रांची: विश्व के कई देशों और भारत के कई राज्यों में ओमिक्रोन के संक्रमित मरीज लगातार मिल रहे हैं. लेकिन अबतक झारखंड में ओमिक्रॉन से किसी के संक्रमित होने की जानकारी नहीं मिली है. झारखण्ड में इस वैरिएंट के पहचान के लिए जांच की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. जिनोम सिक्वेंशिंग मशीन इंस्टाल करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है, फिलहाल सस्पेक्टेड सैंपल को भुवनेश्वर भेजा जाता है. जिसके जांच के बाद रिपोर्ट मिलने में काफी देर होती है.
इस पूरे मामले को लेकर रिम्स के पीआरओ और सीनियर डॉक्टर से जानकारी ली गयी. उन्होंने बताया कि जिनोम सिक्वेंशिंग मशीन सबसे पहले रिम्स के माइक्रो बायोलॉजी विभाग में लगाया जाएगा. राज्य में कोरोना की रफ्तार तेज हो गयी है, एक दिन में लगभग 25 संक्रमित सामने आ रहे हैं. वर्तमान हालात को देखते हुए लोगों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही लोंगों को भारी पड़ सकती है, क्रिसमस और नए साल को लेकर विशेष तौर पर सावधान रहने की जरूरत है. साथ ही लोगों को भीड़ से भी बचने की जरूरत है.
आईसीएमआर के गाइडलाइन के अनुसार राज्य में मिलने वाले कुल पॉजिटिव मरीजों में कुछ के रैंडम सैंपल को जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है. जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पहले आईसीएमआर को जाती है. उसके बाद आइसीएमआर से विभाग के पास आता है, उसके बाद जांच केंद्र को रिपोर्ट भेजी जाती है. वर्तमान में इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक माह का समय लगता है. ऐसे में भेजे गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने में समय लग जाता है.
बताते चलें कि इसके पहले भी कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को अपने आगोश में लिया था. भारत में इसका काफी बुरा असर देखा गया था. कोरोना काल के दोनों फेज के दौरान पूरा भारतवर्ष ठहर सा गया था और हर तरफ से सिर्फ एम्बुलेंस की आवाजें कानों में आती थी. इसलिए लोगों को पहले से सतर्क रहने की जरूरत है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से दिए गए दिशानिर्देशों का अनुपालन जरूरी बताया जा रहा है.
रिपोर्ट- मदन

















