रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, मेरी लॉ बॉर्ग यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक और लॉ बॉर्ग यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के लिए जाने वाले छात्रों और उसके परिजनों का मुख्यमंत्री ने स्वागत किया.
मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का गठन हुए 20 वर्ष हो गए, इस बीच कई उतार-चढ़ाव आया, लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम अपने पैरों पर खड़ा हो.झारखंड के निर्माण और अपनी सभ्यता-संस्कृति को बचाने के लिए हमारे पुरखों ने लम्बी लड़ाई लड़ी है, हमें अपने पुरखों से सिखना होगा.
मरांग गोमके के योगदान को झारखंड नहीं भूला सकता, भारतीय संविधान के निर्माण में मरांग गोमके बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के साथ रहें. हमारी सरकार कई झारखंड के सपूतों के नाम पर कई योजनाओं का संचालन कर रही है, ताकि उनकी पहचान जिंदा रहे और हमारी आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद करे. आदिवासी भाषाओं की भी समस्या है, कई आदिवासी भाषा विलुप्त होने के कगार है. आदिवासी समाज शैक्षणिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह योजना साकार हो पाएगी, क्योंकि इसमें भारत सरकार से लेकर फॉरेन तक कई प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है, लेकिन यह सपना साकार होने जा रहा है. झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने इस प्रकार की योजना को धरातल पर उतारा है. केंद्र सरकार भी इस तरह की योजना चलती है, लेकिन उस योजना तक आदमी का एक्सेस नहीं है, दिल्ली में बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट के बच्चे उस योजना में शामिल किये जाते हैं. हमारी योजना आगे चलकर इस योजना को विस्तार देने की है. अभी तो आदिवासी समाज के बच्चे जा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में अन्य वर्गों को इसमें जोड़ा जाएगा. राज्य में खनिज संपदा के साथ साथ बौद्धिक क्षमता की भी कमी नहीं है, खेल की भी अपार संभावनाएं है. हमारे खिलाड़ियों ने अपने मेहनत से पूरी दुनिया में अपना नाम रौशन किया है, लेकिन उन्हे दो वक्त का रोटी भी नसीब नहीं होता. हमारी सरकार ने झारखंड के 40 खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति पत्र दिया है. पर्यटन की भी असीम संभावना है.
मौके पर मौजूद मंत्री चम्पई सोरेन ने कहा आज का दिन इतिहास के पन्नों में गौरव के साथ लिखा जाएगा. आज के दिन को देखकर गौरव महसूस हो रहा है, भावूक स्वर में मंत्री चम्पई सोरेन ने कहा कि हमलोग बोरा पर पढ़ते थें, लेकिन हमारे बच्चे अब प्लेन से पढ़ने जाएंगे.
मंत्री चम्पई सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलन के सूत्रधार और हमारे आदर्श मरांग गोमके विदेश में पढ़ कर अलग झारखंड राज्य की मांग को स्वर दिया था, बगैर शिक्षा के इस राज्य के धरती पुत्रों का विकास नहीं हो सकता, खनिज-संपदा तो अकूत है, लेकिन विकास के लिए शिक्षा की जरुरत है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन युवा है, राज्य की परिस्थितियों का आकलन कर योजनाओं का निर्माण कर रहे है.
रिपोर्टः मदन
विश्व आदिवासी दिवस पर मोरहाबादी मैदान में नॉर्थ ईस्ट के कलाकारों ने जीता दिल


















