डिजीटल डेस्क : Suspense Prevails – लोकसभा स्पीकर पर आम सहमति न बनने पर अपना दांव चलने के मूड में विपक्ष। देश में आम चुनाव के बाद उभरी तस्वीर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में उसकी अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन से अभी तक लोकसभा स्पीकर को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई वाली एनडीए की फिर से केंद्र में सरकार बनी है। नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बाद प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाल ली है। अब 18वीं लोकसभा का अध्यक्ष कौन होगा? यह सवाल सबकी जुबान पर है। इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा के प्रमुख सहयोगी टीडीपी और जदयू इसके दावेदार बताए जा रहे थे लेकिन जदयू ने भाजपा के पाले में गेंद डाली तो टीडीपी ने अभी तक भाजपा को वैसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। इसी को देखते हुए विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के घटक दल अपने अंदाज पर इसी मसले पर दांव चलने की फिराक में हैं ताकि चुनाव में भले ही वह एनडीए को परास्त न कर पाए हों लेकिन लोकसभा स्पीकर के बहाने ही एनडीए में दरार दिखे और उसका सीधा लाभ आईएनडीआईए को मिल सके।
26 जून को होना है लोकसभा के स्पीकर का चयन
लोकसभा चुनाव के बाद संसद का पहला सत्र 24 जून से शुरू होगा जो 3 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान 26 जून को नई लोकसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) का भी चयन होना है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 जून को लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी। हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर जीत मिली और पार्टी बहुमत के आंकड़े 272 से 32 कम है। ऐसी स्थिति में टीडीपी (16) और जदयू (12) सीटों के साथ किंगमेकर बनकर उभरी हैं। टीडीपी ने लोकसभा उम्मीदवार पद पर दावा भी पेश किया था। आम आदमी पार्टी और विपक्षी गठबंधन ने भी मांग की है कि लोकसभा स्पीकर का पद जदयू या तेदेपा को मिलना चाहिए। पिछले दो बार से बगैर किसी टकराव के लोकसभा अध्यक्ष का चयन होता आया है लेकिन इस बार चुनाव में मजबूत होकर उभरे विपक्ष ने लोकसभा उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारी शुरू कर दी है।
डिप्टी स्पीकर की मांग समेत अन्य विकल्पों पर मंथन कर रहा विपक्ष
अभी जो संकेत मिल रहे हैं, उसमें विपक्ष सहमति के आधार पर लोकसभा उपाध्यक्ष पद की मांग रखेगा लेकिन यदि सहमति नहीं बनी तो वह लोकसभा अध्यक्ष के लिए भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार सकता है। इस बीच लोकसभा में 99 सीटों के साथ विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा शुरू कर चुकी है। आम तौर पर यह परंपरा रही है की उपाध्यक्ष विपक्ष से होता है। लोकसभा में इस बार स्थिति काफी बदली हुई होगी। 10 साल बाद विपक्ष का कोई नेता सदन में होगा। साथ ही विपक्ष की संख्या भी अच्छी रहेगी। ऐसे में वह हर मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करेगा। लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन को इस बार 233 सीटें मिली है। बता दें कि वर्ष 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद 16वीं लोकसभा में डिप्टी स्पीकर पद भाजपा की अगुवाई वाले राजग ने अन्नाद्रमुक को दिया गया था। उसकी ओर से एम थंबीदुरई डिप्टी स्पीकर बनाए गए थे। वहीं 2019 में 17वीं लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का चुनाव ही नहीं किया गया और पद पूरे समय खाली ही रहा।

संजय राउत बोले – टीडीपी को स्पीकर पद पर नहीं मिला तो आईएनडीआईए देगा समर्थन
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा है कि लोकसभा स्पीकर का पद एनडीए गठबंधन के किसी नेता को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने लोकसभा स्पीकर का पद मांगा है और अगर उन्हें यह पद नहीं मिलता है तो हम ये सुनिश्चित करेंगे कि तेदेपा के उम्मीदवार को आईएनडीआईए गठबंधन का समर्थन मिले। संजय राउत ने कहा कि ‘लोकसभा स्पीकर पद के लिए लड़ाई अहम है। इस बार स्थिति 2014 और 2019 जैसी नहीं है। सरकार स्थिर नहीं है। हमने सुना है कि चंद्रबाबू नायडू ने लोकसभा स्पीकर का पद मांगा है। अगर एनडीए के उम्मीदवार को यह पद नहीं मिला तो पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह टीडीपी, जेडीयू और लोजपा (रामविलास) को तोड़ सकते हैं। अगर चंद्रबाबू नायडू को यह पद नहीं मिलता है तो हम ये सुनिश्चित करेंगे कि उनके उम्मीदवार को आईएनडीआईए गठबंधन का समर्थन मिले।’
केसी त्यागी बोले- लोकसभा स्पीकर पद पर पहला अधिकार सत्तारूढ़ दल का
इस बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता केसी त्यागी ने इंडी गठबंधन की आलोचना की और बताया कि कुर्सी का हकदार कौन हैं। उन्होंने कहा, ‘लोकसभा स्पीकर का पद सदन का सबसे गरिमापूर्ण पद होता है। उस पद पर पहला अधिकार सत्तारूढ़ दल का है। इंडी गठबंधन की मांगें और बयान आपत्तिजनक हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम मानते हैं कि भाजपा एनडीए की बड़ी पार्टी है। उस पद पर भाजपा या एनडीए का पहला अधिकार है। मैं पिछले 35 सालों से एनडीए में हूं। भाजपा ने कभी जनता दल को तोड़ने की कोशिश नहीं की। टीडीपी और जदयू ने अहम भूमिका निभाई है। मगर हम एनडीए को कमजोर करने की कोशिश कभी नहीं करेंगे।’ दूसरी ओर पटना में भाकपा माले विधायक रामबली सिंह यादव ने कहा कि एनडीए में अगर स्पीकर पद किसी को देना चाहिए तो नीतीश कुमार या फिर चंद्रबाबू नायडू को देना चाहिए क्योंकि इन दोनों के बलबूते सरकार चल रही है। इसके साथ उन्होंने केसी त्यागी के बयान पर कहा कि केसी त्यागी की अपनी व्यक्तिगत राय हो सकती है लेकिन नीतीश कुमार का इतिहास रहा है वह कुछ न कुछ समझौते कर सरकार में शामिल हो ही जाते हैं।


















