बोकारोः दीपों का त्यौहार दीपावली का आगमन होने जा रहा है. बाजार में रौनक भी दिखाई देने लगी है. लेकिन मंहगाई डायन और चाइनीज लाइट से कुम्भकार हलकान है.
दीपावली की तैयारी को लेकर कुम्हार भी तैयारियों में जुटे है. जिस आशा और उम्मीद के साथ दीए का निर्माण किया जा रहा है, उस अनुपात में व्यवसाय नहीं हो पा रहा है. अपने दीए से दूसरों के घरों में रोशनी फैलाने वाले कुम्भकारों के घरों में अंधेरा पसरा है.
इलेक्ट्रॉनिक बाजार और चाइनीज लाइट ने इस व्यवसाय को बर्वाद कर दिया है. दीए की बिक्री होती भी है तो उसकी कीमत कम मिलती है. यही कारण है कि कुम्भकारों को मजबूरन कम दीए का निर्माण करना पड़ रहा है.
बोकारो के सेक्टर 8 में बरसों से दीए और मिट्टी के बर्तनों का निर्माण किया जा रहा है. इस चौक को ही कुम्हार चौक के नाम से जाना जाता है. कई कुम्भकार परिवार यहां रहते हैं. कुम्भकार बताते हैं कि पहले छह माह पहले तैयारी शुरु हो जाती थी. लेकिन अब दीए की मांग ही नहीं है. लागत के अनुपात में लाभ नहीं मिल पा रहा. पहले इस सीजन की कमाई से ही साल भर गुजारा हो जाता था. अब तो पचास हजार रुपये के लिए भी सोचना पड़ रहा है.
आपको याद होगा कि दिवाली के मौके पर पहले घरों में सौ दो सौ दीए जलाए जाते थे. लेकिन, अब लोग इससे परहेज करने लगे है. अब चाइनीज दीए लोगों की पसंद बन गई है, उनकी कोशिश होती है कि चाइनीज दीए से घरों को सजाया जाय. एक तो उसकी कीमत कम होती है और वह रंग-बिरंगा भी होता है. अब मांग चाइनीज दीए की है. पूरा बाजार चाइनीज प्रोड्क्ट से भरा पड़ा है. यदि यही हालात रहे तो हमें इस व्यवसाया को समेटना होगा.
रिपोर्टः चुमन

















