रांचीः झारखंड हाईकोर्ट में एपीपी रजनीश वर्धन को दानापुर पुलिस द्वारा जबरन उठा लिए जाने के मामले में जस्टिस सुजीत नारायण और जस्टिस आनंद सेन की अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने बिहार पुलिस से पूछा यदि गिरफ्तारी विधिवत हुई तो अधिवक्ता को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया, ट्रांजिट नियमों का अनुपालन क्यों नहीं हुआ?
सुनवाई के दौरान दानापुर के अपर पुलिस अधीक्षक इमरान आनन-फानन में सुनवाई से जुड़े और गिरफ्तारी से इनकार किया. जबकि रांची, एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने अदालत को बताया कि दानापुर पुलिस गिरफ्तारी ने वारंट की बात कह कर सहयोग की मांग की थी.
अदालत के बार-बार पूछने पर बिहार पुलिस ने गिरफ्तारी की बात स्वीकार कर लिया. अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि अधिवक्ता के आवास से गिरफ्तारी क्यों की गई और इस संबंध में जानकारी क्यों नहीं दी गई. अदालत ने मौखिक रुप से पूछा कि यह क्यों नहीं माना जाए कि पुलिस ने अधिवक्ता का अपहरण किया है.
बता दें कि इस मामले में बिहार के गृह सचिव को भी प्रतिवादी बनाया गया है. रजनीश वर्धन झारखंड हाईकोर्ट के एपीपी है. अधिवक्ता की पत्नी श्वेता प्रियदर्शनी ने सोमवार को हैवियस कॉर्पस याचिका दाखिल की है.
रिपोर्टः प्रोजेश

















