
रांची: झारखंड विधानसभा में भाषा संशोधन को लेकर उठी मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विधायक जयराम महतो ने अंगीकृत बिहार राजभाषा संशोधन अधिनियम 2011 के तहत द्वितीय राज्य भाषा के रूप में मान्य भाषाओं में “कुरमाली” शब्द की वर्तनी में संशोधन की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इसे “कुड़माली” किया जाए, ताकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुरूप भाषा को सही स्वरूप मिल सके।
जयराम महतो ने सदन में इस विषय पर ऐतिहासिक और भाषाई प्रमाण भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि झारखंड का गठन भाषा और संस्कृति की मान्यता के आधार पर हुआ है, और इसी संदर्भ में “कुड़माली” भाषा के नाम में आवश्यक सुधार जरूरी है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ओडिशा में पहले “उड़ीसा” लिखा जाता था, जिसे बाद में सही उच्चारण और परंपरा के आधार पर बदला गया। इसी तरह, अंग्रेजी भाषा के अभावों के कारण “र” का प्रचलन बढ़ा, जबकि स्थानीय कुड़माली साहित्य में “अड़” ध्वनि का विशेष महत्व है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि इस विषय पर विस्तृत आकलन कराया जाएगा और यदि मांग तथ्यात्मक रूप से सही पाई जाती है, तो उचित सुधार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा और संस्कृति किसी भी राज्य की पहचान होती है और सरकार इसके संरक्षण व संवर्धन के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
इस बयान के बाद कुड़माली भाषा से जुड़े लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। अब सरकार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।




