रांची: झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अनिल टाइगर उर्फ अनिल महतो की दिन-दहाड़े हत्या के बाद राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राज्य में अपराधियों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है और हेमंत सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है।
विधानसभा के बाहर बीजेपी का प्रदर्शन
गुरुवार को विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत बीजेपी के कई विधायक विधानसभा के बाहर तख्ती लेकर बैठ गए और राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारी विधायकों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था—”झारखंड में अपराधियों पर कब लगेगी लगाम?” और “हेमंत सरकार इस्तीफा दो!”
विधायकों का हमला: “हेमंत है तो हिम्मत है, लेकिन अपराधियों की!”
बीजेपी विधायक नीरा यादव ने हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हेमंत सरकार का नारा है—’हेमंत है तो हिम्मत है’, लेकिन यह हिम्मत सिर्फ अपराधियों के लिए है। राज्य में कोई भी सुरक्षित नहीं है। दिन-दहाड़े लोगों की हत्याएं हो रही हैं, अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं, और सरकार मौन है।”
बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो ने भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “झारखंड में अपराधी बेलगाम हो चुके हैं। पुलिस को सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं।”
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बयान
बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “राज्य में हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक अपराध की घटनाएं हो रही हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।” उन्होंने कहा कि सरकार को कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम उठाने चाहिए, वरना राज्य में अराजकता की स्थिति और भी खराब हो जाएगी।
हत्या के बाद सियासी माहौल गर्म
बता दें कि हाल ही में अनिल टाइगर की हत्या ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बीजेपी का आरोप है कि सरकार अपराधियों को खुली छूट दे रही है, जिसके कारण दिन-ब-दिन हत्या और लूटपाट की घटनाएं बढ़ रही हैं। विधानसभा के बाहर बीजेपी विधायकों का प्रदर्शन यह दिखाता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
झारखंड की राजनीति में यह कोई नया मामला नहीं है, लेकिन इस बार सरकार पर विपक्ष का हमला और भी तीखा हो गया है। अब देखना होगा कि हेमंत सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाती है।


















