Jharkhand Teacher Protest 2026: शिक्षक दिवस के अवसर पर जहां राज्यभर के शिक्षक इस दिन को उत्साह के साथ मनाने की तैयारी में हैं, वहीं झारखंड के करीब 10 हजार वित्तरहित शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। 5 सितंबर को राज्य के सभी वित्तरहित अनुदानित इंटरमीडिएट कॉलेज, हाईस्कूल, संस्कृत विद्यालय और मदरसों में शिक्षाकर्मी धरना देंगे। आंदोलन में शिक्षक-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के शामिल होने की संभावना जतायी गयी है।
लोक भवन के सामने प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति
झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने शिक्षक दिवस के दिन लोक भवन के सामने शांतिपूर्ण एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था। इसके लिए मोर्चा की ओर से जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर अनुमति मांगी गयी थी। हालांकि, प्रशासन की ओर से लोक भवन के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गयी। इसके बाद मोर्चा ने आंदोलन का स्वरूप बदलते हुए राज्यभर के वित्तरहित संस्थानों में 5 सितंबर को धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। मोर्चा का दावा है कि राज्य के करीब 1250 वित्तरहित संस्थानों में आंदोलन किया जायेगा। इसके लिए संस्थान स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
75 फीसदी अनुदान वृद्धि की प्रमुख मांग
धरना-प्रदर्शन की तैयारियों को लेकर मोर्चा के अध्यक्ष मंडल की शुक्रवार को बैठक हुई। बैठक में आंदोलन की रणनीति और विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा की गयी। मोर्चा की प्रमुख मांगों में 75 फीसदी अनुदान वृद्धि से संबंधित संलेख को अविलंब कैबिनेट की सहमति के लिए भेजना शामिल है। इसके साथ ही वित्तरहित शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग भी की गयी है। मोर्चा ने सभी वित्तरहित संस्थाओं की छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की मांग की है। इसके अलावा इंटरमीडिएट कॉलेज, हाईस्कूल, संस्कृत विद्यालय और मदरसा के शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर सेवाशर्त नियमावली बनाने की मांग भी रखी गयी है।
जैक के खाली पदों को भरने की मांग
मोर्चा ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी जैक से जुड़े मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। संगठन ने जैक के वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और शैक्षणिक पदाधिकारी को हटाने की मांग की है। इसके अलावा जैक में करीब 18 महीने से खाली उपाध्यक्ष के पद को भरने तथा मई से रिक्त सदस्यों के पदों पर नियुक्ति करने की मांग की गयी है। मोर्चा ने बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त 158 स्थापना अनुमति प्राप्त अनुदानित विद्यालयों को वर्ष 2026-27 से मिलने वाले अनुदान को रोकने के फैसले पर भी रोक लगाने की मांग की है।
इन मांगों को लेकर होगा प्रदर्शन
वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से जिन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, उनमें 75 फीसदी अनुदान वृद्धि का संलेख कैबिनेट की सहमति के लिए भेजना, शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देना और छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा जैक में वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और शैक्षणिक पदाधिकारी को हटाने, खाली उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद भरने तथा 158 अनुदानित विद्यालयों का 2026-27 से अनुदान रोकने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गयी है। मोर्चा सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर वित्तरहित संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सेवाशर्त नियमावली बनाने की मांग भी कर रहा है।
बैठक में मौजूद रहे कई पदाधिकारी
आंदोलन की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में अध्यक्ष मंडल के रघुनाथ सिंह, संजय कुमार, नरोत्तम सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, देवनाथ सिंह, फजलुल कादरी अहमद, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, गणेश महतो, मनीष कुमार, मनोज तिर्की, अनिल तिवारी, विनय उरांव, रेशमा बेक, रघु विश्वकर्मा, रणजीत मिश्रा, मनोज कुमार, मुरारी प्रसाद सिंह और पशुपति महतो समेत अन्य सदस्य मौजूद थे। मोर्चा के निर्णय के अनुसार अब 5 सितंबर को राज्यभर के वित्तरहित संस्थानों में धरना-प्रदर्शन किया जायेगा। संगठन की ओर से आंदोलन को लेकर अपनी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गयी है।


















