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रामशिला पर्वत में अद्वितीय मूंगे वाले गणपति, 200 सालों से पूरी करते हैं हर मुराद

गयाजी : गयाजी का रामशिला पहाड़ सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी पहचान से भी खास है। यहां रामशिला की तराई में मूंगे से बनी भगवान गणेश की पांच फिट की विशाल प्रतिमा स्थापित है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मूर्ति पूरे देश में अद्वितीय है। कहीं और ऐसी प्रतिमा नहीं मिलती। यही कारण है कि यहां सच्चे मन से आने वाला भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। इस गणपति को सिद्धिविनायक के नाम से जाना जाता है। कारण है मूर्ति की आकृति। गणपति की सूंढ़ व दंत दाहिनी ओर है, जो उन्हें सिद्धिविनायक का स्वरूप देता है। भक्त मानते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है।

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18वीं सदी से इतिहास जुड़ा

पुजारियों और इतिहासकारों के मुताबिक, यह मूर्ति 18वीं शताब्दी से चर्चा में है। मन्दिर के पुजारी लक्ष्मण बाबा बताते हैं कि टिकारी महाराज गोपाल शरण के पूर्वजों के समय से इसका जिक्र मिलता है। बेशक इस मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में निर्माण कराया गया था। हालांकि मूर्ति कितनी प्राचीन है, इसका सटीक प्रमाण नहीं है। लेकिन दो सौ साल से अधिक का इतिहास इसकी प्राचीनता और चमत्कारी महिमा को साबित करता है। पुजारी लक्ष्मण बताते हैं कि मूंगे की बनी यह प्रतिमा करीब चार फीट ऊंची है। चार भुजाओं वाले गणपति कमलासन पर विराजमान हैं। उनके मस्तक पर चंद्रमा है। एक दांत टूटा हुआ है और पैरों के पास रिद्धि और सिद्धि स्थापित हैं।

मूंगे से बनी अनोखी प्रतिमा

मूंगे का पत्थर समुद्र की गहराई में पाया जाता है। गणेश जी की यह प्रतिमा पूरी तरह से इसी से बनी है। पुजारी कहते हैं कि देशभर में मूंगे की गणपति प्रतिमा केवल गया में ही है। कुछ लोगों का कहना है कि बेतिया में भी छोटी सी प्रतिमा है, लेकिन वहां की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। पुजारी लक्ष्मण ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व ख्याति प्राप्त जज संजय कैरोल भगवान का दर्शन करने आए थे। उन्होंने बताया था कि बेतिया में भी मूंगे का गणेश भगवान हैं। भक्त अभिषेक राज का कहना हैं कि मैं यहां अक्सर दर्शन करने आता हूं। इस मूर्ति की प्रसिद्धि जितनी देश स्तर पर होनी चाहिए थी, उतनी नहीं है। जरूरत है कि अद्वितीय मूंगे वाले गणपति की पहचान पूरे देश तक पहुंचे।

गर्मी में निकलता है पानी

पुजारी लक्ष्मण बाबा ने बताया कि इस प्रतिमा से जुड़ा एक और चमत्कार भक्तों को आकर्षित करता है। अधिक गर्मी पड़ने पर मूर्ति से पानी निकलने लगता है। श्रद्धालु इसे भगवान का आशीर्वाद मानते हैं। मंदिर में जब यह दृश्य होता है तो पंखा और कूलर लगा कर मूर्ति को सुखाया जाता है। इस चमत्कार के पीछे कई लोक कथाएं भी प्रचलित हैं।

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गणेश चतुर्दशी पर उमड़ता है सैलाब

उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्दशी पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दराज से लोग आते हैं और अपनी मन्नतें लेकर गणपति के चरणों में माथा टेकते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाला हर भक्त विघ्नों से मुक्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर

गया के रामशिला में विराजमान यह गणपति सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी है। 200 वर्षों से अधिक समय से यह प्रतिमा यहां के लोगों की आस्था को संजोए हुए है। हर वर्ष गणेश चतुर्दर्शी के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। पूर्व में जब राजा रजवाड़े और जमींदार हुआ करते थे तो गणेश चतुर्दशी को शास्त्रीय गीत संगीत का भव्य कार्य्रकम होता था। बड़े बड़े दिग्गज कलाकार विभिन्न विधा के आया करते थे। बड़ी महफिल सजती थी जो रातभर चलती थी। जिसका निर्वहन अब भी किया जा रहा है। भक्तों का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ गया की पहचान नहीं, बल्कि बिहार और पूरे देश के लिए गौरव है। यहां आने वाले श्रद्धालु विश्वास के साथ लौटते हैं कि उनकी मनोकामना पूरी होगी।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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