Urban Local Body Election:आरक्षित वार्ड के वोटर भी लड़ सकेंगे चुनाव


झारखंड नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों की पात्रता और अयोग्यता को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए, आरक्षित वार्ड के वोटरों को मिली राहत।


Urban Local Body Election रांची:झारखंड में लंबित नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों की अर्हता और अयोग्यता से जुड़े नियमों को स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने साफ किया है कि यदि कोई उम्मीदवार ऐसे वार्ड का मतदाता है जो आरक्षित है, तो वह नगर निकाय के किसी अन्य वार्ड से चुनाव लड़ सकता है। यह शर्त होगी कि जिस वार्ड से उम्मीदवार नामांकन करेगा, वहां लागू आरक्षण नियमों का पालन अनिवार्य होगा। यह निर्देश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सभी जिलों को भेजे गए हैं।


Key Highlights:

  • आरक्षित वार्ड के वोटर को दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की अनुमति

  • प्रत्याशी का नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य

  • नामांकन के समय संबंधित वार्ड के आरक्षण नियमों का पालन जरूरी

  • आरक्षण बदलाव से प्रभावित पार्षदों को मिली राहत

  • दो से अधिक संतान पर अयोग्यता नियम फिर से स्पष्ट


Urban Local Body Election:नगर निकाय के किसी भी वार्ड से चुनाव की अनुमति
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्याशी का संबंधित नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य है। हालांकि, नगर निकाय की मतदाता सूची में शामिल व्यक्ति उसी निकाय के किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकता है। लेकिन नामांकन उसी स्थिति में मान्य होगा, जब प्रत्याशी उस वार्ड में लागू आरक्षण व्यवस्था, जैसे महिला या वर्ग विशेष के आरक्षण, की शर्तें पूरी करता हो।

Urban Local Body Election:आरक्षण बदलने से प्रभावित नेताओं को राहत
नए नियमों से उन पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों को बड़ी राहत मिली है, जिनके वार्ड हालिया आरक्षण रोस्टर में महिला या अन्य वर्गों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। अब ऐसे प्रत्याशी, जो आरक्षित वार्ड के मतदाता हैं लेकिन आरक्षण के कारण वहां से चुनाव नहीं लड़ सकते, वे किसी अन्य उपयुक्त वार्ड से अपनी दावेदारी पेश कर सकेंगे।

Urban Local Body Election:दो से अधिक संतान पर अयोग्यता का नियम दोहराया
राज्य निर्वाचन आयोग ने दो से अधिक संतान के आधार पर अयोग्यता के नियम को भी स्पष्ट रूप से दोहराया है। आयोग के अनुसार, जिन उम्मीदवारों की अंतिम संतान का जन्म 9 फरवरी 2013 के बाद हुआ है और जिनकी संतान संख्या दो से अधिक हो गई है, वे नगर निकाय चुनाव लड़ने के अयोग्य होंगे। वहीं, जिनकी दो से अधिक संतान 9 फरवरी 2013 या उससे पहले हो चुकी थी और उसके बाद संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई, वे चुनाव लड़ने के पात्र बने रहेंगे।

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