Jharkhand Paper Leak Scam: सिपाही भर्ती में 10 लाख की डील, रटवाने वाले नेटवर्क का बड़ा खुलासा

 झारखंड सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, अभ्यर्थियों से 10 लाख में डील, संगठित गैंग और पूरी साजिश का पर्दाफाश।


Jharkhand Paper Leak Scam रांची: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। राजधानी रांची से जुड़े इस मामले में एक संगठित नेटवर्क द्वारा अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र रटवाने से लेकर परीक्षा पास कराने तक की पूरी साजिश रची गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में शामिल हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी।

Jharkhand Paper Leak Scam:  अर्धनिर्मित भवन में रटवाने की साजिश

जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य क्रिस्टोफर ने रड़गांव में एक अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज भवन को अभ्यर्थियों के ठहरने और प्रश्नपत्र रटवाने के लिए इस्तेमाल किया। उसने ठेकेदार से मिलीभगत कर यह भवन गैंग को उपलब्ध कराया था। 11 अप्रैल को अभ्यर्थियों के वहां पहुंचने के बाद वह खुद भी मौके पर मौजूद था, लेकिन पुलिस छापेमारी से पहले फरार हो गया। भागने से पहले उसने अपना मोबाइल नंबर अन्य सदस्यों के फोन से डिलीट कर दिया और दो नए मोबाइल देकर संपर्क व्यवस्था बनाए रखी।

Jharkhand Paper Leak Scam: गैंग के सदस्यों की तय भूमिकाएं

इस पूरे नेटवर्क में हर सदस्य की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय थी

  • विकास कुमार: व्हाट्सएप पर मिले प्रश्नपत्र को रड़गांव लाकर प्रिंट कर अभ्यर्थियों को रटवाना
  • अतुल वत्स: मास्टरमाइंड, अभ्यर्थियों को जोड़ना, एडमिट कार्ड मंगवाना और डील तय करना
  • चुनचुन कुमार: परीक्षा संचालन एजेंसी से प्रश्नपत्र लीक कर गैंग तक पहुंचाना
  • आशीष कुमार: अभ्यर्थियों को झांसा देकर गैंग से जोड़ना
  • योगेश कुमार: कैंडिडेट्स का डाटा जुटाना और स्क्रीनिंग करना
  • मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह: रड़गांव में पूरे सेटअप को संभालना और संपर्क बनाए रखना

Key Highlights

  • सिपाही भर्ती पेपर लीक में संगठित गैंग का खुलासा

  • अभ्यर्थियों को रटवाने के लिए अर्धनिर्मित भवन का इस्तेमाल

  • हर अभ्यर्थी से 10 लाख रुपए की डील, 3 लाख एडवांस

  • गैंग के हर सदस्य की तय थी अलग जिम्मेदारी

  • पुलिस जांच में नेटवर्क के कई अहम राज उजागर


Jharkhand Paper Leak Scam:  10 लाख में पास कराने की डील

गिरोह अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर 10-10 लाख रुपए की डील करता था। इसके बदले तीन-तीन लाख रुपए एडवांस लिए जाते थे। भुगतान नकद और चेक दोनों माध्यमों से लिया गया। इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों से उनके मूल प्रमाण पत्र भी जमा कराए जाते थे और शर्त रखी जाती थी कि चयन के बाद पूरी राशि मिलने पर ही दस्तावेज लौटाए जाएंगे।

Jharkhand Paper Leak Scam: सुनियोजित तरीके से रचा गया पूरा नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था। प्रश्नपत्र लीक से लेकर अभ्यर्थियों को रटवाने और पैसों की वसूली तक हर चरण में अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय थी, जिससे इस संगठित अपराध को अंजाम दिया जा सके।

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