पटना : भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) क्षेत्रीय कार्यालय पटना द्वारा पांच जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बापू टावर पटना के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ‘जब नदी जागी’ नामक वृत्तचित्र का प्रदर्शन, बिहार के सीतामढ़ी जिले की लखनदेई नदी के पुनर्जीवन पर प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा विचार-विमर्श, नदी पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन व राजीव सिन्हा एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत अर्ध-शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम ‘साज-ए-फिजा’ शामिल था।
कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक स्वधा रिजवी व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नीलम चौधरी द्वारा किया गया
कार्यक्रम का उद्घाटन आईसीसीआर क्षेत्रीय कार्यालय पटना की क्षेत्रीय निदेशक स्वधा रिजवी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नीलम चौधरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर बापू टावर के उपनिदेशक ललित कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, विद्यार्थियों, संस्कृति प्रेमियों, सरकारी अधिकारियों व बापू टावर के आगंतुकों सहित 100 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। यह पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता और रुचि का परिचायक रहा।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण दीपेश चंद्र द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र ‘जब नदी जागी’ का प्रदर्शन था
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण दीपेश चंद्र द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र ‘जब नदी जागी’ का प्रदर्शन था। इस वृत्तचित्र में सीतामढ़ी की लखनदेई नदी के पुनर्जीवन की प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत की गई व पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के लिए स्थानीय समुदायों और विभिन्न हितधारकों द्वारा किए गए सामूहिक प्रयासों को रेखांकित किया गया। इस फिल्म ने दर्शकों को नदियों के पारिस्थितिक महत्व और उनके संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाया।

चर्चा के दौरान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व नागरिकों के बीच पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया
विचार-विमर्श सत्र में लखनदेई नदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं प्रख्यात पुरातत्वविद् रामशरण अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका आशा प्रभात और सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर आनंद किशोर ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, नदी संरक्षण, सांस्कृतिक धरोहर और पारिस्थितिक पहलों में सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। चर्चा के दौरान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और नागरिकों के बीच पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक खंड का मुख्य आकर्षण राजीव सिन्हा द्वारा प्रस्तुत अर्ध-शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम ‘साज-ए-फिजा’ रहा
कार्यक्रम के सांस्कृतिक खंड का मुख्य आकर्षण राजीव सिन्हा द्वारा प्रस्तुत अर्ध-शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम ‘साज-ए-फिजा’ रहा। प्रकृति, लय और सामंजस्य के सूक्ष्म संबंधों से प्रेरित इस प्रस्तुति ने पर्यावरणीय संतुलन एवं शांति के भाव को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। अपनी भावपूर्ण रचना और उत्कृष्ट प्रस्तुति के माध्यम से इस कार्यक्रम ने विश्व पर्यावरण दिवस के आयोजन को एक चिंतनशील और कलात्मक आयाम प्रदान किया। इसकी प्रस्तुति ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया तथा व्यापक सराहना प्राप्त की।

संस्कृति, कला और बौद्धिक विमर्श के माध्यम से राष्ट्रीय एवं सामाजिक महत्व के विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया
इस पहल के माध्यम से आईसीसीआर क्षेत्रीय कार्यालय, पटना ने संस्कृति, कला और बौद्धिक विमर्श के माध्यम से राष्ट्रीय एवं सामाजिक महत्व के विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। यह कार्यक्रम पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करने का एक सार्थक मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ व विश्व पर्यावरण दिवस की भावना के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में जन-सहभागिता को बढ़ाने का पुनः आह्वान किया गया।
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