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RIMS Land Scam: रिम्स जमीन घोटाले में बड़ा खुलासा, पूर्व पार्षद सुधा देवी ने फर्जी हस्ताक्षर से वंशावली बनाने का लगाया आरोप

रिम्स जमीन घोटाला मामले की एसीबी जांच में पूर्व पार्षद सुधा देवी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने वंशावली प्रमाण पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर कर जमीन हड़पने की साजिश का आरोप लगाया है।


RIMS Land Scam रांची: रांची के चर्चित रिम्स जमीन घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच के दौरान नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-4 की तत्कालीन पार्षद सुधा देवी का बयान दर्ज किया गया। पूछताछ के दौरान सुधा देवी ने एसीबी के अनुसंधानकर्ताओं को बताया कि रिम्स की जमीन हड़पने के उद्देश्य से उनके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी वंशावली प्रमाण पत्र तैयार किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संबंधित दस्तावेज पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है।

RIMS Land Scam:हस्ताक्षर मिलान में सामने आया बड़ा तथ्य

पूछताछ के दौरान एसीबी अधिकारियों ने सुधा देवी से हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कई बार हस्ताक्षर करवाए। जांच में पाया गया कि उनके वर्तमान हस्ताक्षर और वंशावली प्रमाण पत्र पर दर्ज हस्ताक्षरों में कोई समानता नहीं है। इससे फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की आशंका और मजबूत हो गई है। एसीबी अब इस बात की जांच कर रही है कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने और किन परिस्थितियों में तैयार किए।

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Key Highlights

  • एसीबी ने रिम्स जमीन घोटाला मामले में पूर्व पार्षद सुधा देवी का बयान दर्ज किया।

  • सुधा देवी ने वंशावली प्रमाण पत्र पर दर्ज हस्ताक्षर को फर्जी और मनगढ़ंत बताया।

  • जांच में अधिग्रहित जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े की बात सामने आई।

  • निजी व्यक्तियों और बिल्डरों को जमीन बेचने के आरोपों की जांच जारी।

  • पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन हस्तांतरण का मामला भी जांच के घेरे में।


RIMS Land Scam:अधिग्रहित जमीन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का आरोप

हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच में एसीबी को जानकारी मिली कि वर्ष 1968-69 में रिम्स के लिए खाता संख्या-107 और प्लॉट संख्या-1963 की कुल 93 डिसमिल जमीन में से 60 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया गया था। आरोप है कि बाद में इसी अधिग्रहित जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर उसे निजी व्यक्तियों और बिल्डरों के नाम पर बेच दिया गया। जांच एजेंसी अब भूमि रिकॉर्ड में हुए बदलावों और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।

RIMS Land Scam:वंशज होने का दावा खारिज होने के बाद भी नाम दर्ज

जांच में यह भी सामने आया कि सोनमइत देवी नामक महिला ने पूर्व में एसएआर कोर्ट में स्वयं को खतियानी रैयत साहोदरी देवी की वंशज बताते हुए दावा किया था। हालांकि वंशावली और अनुसूचित जनजाति से संबंध साबित नहीं होने पर उनका दावा खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद बाद में कथित रूप से हेरफेर कर उनका नाम रजिस्टर-2 में दर्ज कर दिया गया।

RIMS Land Scam:पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए हुआ जमीन हस्तांतरण

एसीबी को जांच के दौरान यह जानकारी भी मिली कि राज किशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक और उनके दिवंगत भाई नंद किशोर बड़ाइक ने स्वयं को उक्त भूमि का उत्तराधिकारी बताते हुए सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी सोनू कुमार सारण को दिया था। इसके बाद सोनू कुमार सारण ने करीब 18 डिसमिल जमीन अपनी पत्नी पूजा सारण के नाम हस्तांतरित कर दी। जांच एजेंसी अब इस पूरी प्रक्रिया की वैधता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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