पटना : बिहार के राजधानी पटना जिला में बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। कल यानी दो जुलाई को भारत निर्वाचन आयोग ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस सीट पर 30 जुलाई को चुनाव होंगे जबकि तीन अगस्त को इसके नतीजे आएंगे। बता दें कि ये सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गढ़ रही है। पिछले तीन दशक से यहां पिता-पुत्र की जोड़ी कमाल करती रही है। दोनों ने 1995 के बाद हर चुनाव जीता है।
हम बात कर रहे हैं BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की
आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की। 1995 के बाद यह पहली बार होगा जब इन दोनों में से कोई बीजेपी का उम्मीदवार नहीं होगा। नवीन किशोर 1995 में पहली बार इस सीट पर जीते थे। उसके बाद लगातार चार चुनाव में जीत दर्ज की। जब उनका निधन हुआ तो उसके बाद साल 2006 में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नवीन जीते।
नितिन नवीन ने इस सीट पर 2006 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में जीत दर्ज की
वहीं नितिन नवीन ने इस सीट पर 2006 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में जीत दर्ज की। यानी लगातार पांच चुनाव में जीत दर्ज की। अब उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। नितिन नवीन बीजेपी के राज्यसभा सांसद हो चुके हैं और पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। यानी अब सीट बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। दूसरी ओर प्रशांत किशोर ने चुनौती को और बढ़ा दिया है।
साल 2014 के बाद कुछ बड़े उलटफेर ने BJP को चौंकाया है
दरअसल, साल 2014 के बाद कुछ बड़े उलटफेर ने बीजेपी को चौंकाया है। खास तौर पर योगी आदित्यनाथ की सीट गोरखपुर। जब सीएम योगी मुख्यमंत्री बने तब गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद थे। उन्होंने सीट खाली की और उपचुनाव हुआ। बीजेपी ने उपेंद्र दत्त शुक्ल को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उपेंद्र दत्त शुक्ल ये चुनाव हार गए और इसकी चर्चा खुब हुई। राज्य में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री है। इस सीट से पूर्व विधायक अब राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो पार्टी हार किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन प्रशांत किशोर के सामने आसान कुछ नहीं होने वाला है।
प्रशांत किशोर ने कहा- ये केवल एक विधानसभा चुनाव नहीं है। बांकीपुर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट है
प्रशांत किशोर ने कहा है कि ये केवल एक विधानसभा चुनाव नहीं है। बांकीपुर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट है। पिछले 40 सालों में इस सीट पर बीजेपी को कोई दल या नेता हरा नहीं पाया है। जन सुराज के सूत्रधार कहते हैं कि पहली बार बीजेपी का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बना है। एक तरह से बांकीपुर उपचुनाव नवंबर 2025 में किए गए उनके वादों पर रेफरेंडम भी होगा। उन्होंने कहा कि जो वादे जनता से किए गए उन वादों पर अपना मत जनता को देने का यह रेफरेंडम के तहत यह अधिकार होगा। जन सुराज ये समझता है कि हमें ये चुनाव पूरी ताकत से लड़ना होगा।
ये पहला चुनाव होगा जब पिछले 30 सालों में बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिता-पुत्र की जोड़ी मैदान में नहीं होगी
प्रशांत किशोर बीते कुछ महीने में कई बार बांकीपुर का दौरा कर चुके हैं। यानी वो वहां का थाह पानी पहले से लेने लगे हैं। यानी अब प्रशांत ने बड़ा रिस्क तो लिया है। दूसरी ओर बीजेपी की चुनौती बढ़ा दी है। ये पहला चुनाव होगा जब पिछले 30 सालों में बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिता-पुत्र की जोड़ी मैदान में नहीं होगी। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा साल 2005 में स्वर्गवासी हो चुके हैं। जबकि नितिन नवीन अब राज्यसभा सांसद हो गए हैं।
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