Bokaro Forest Land Scam: 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि घोटाले का मुख्य आरोपी पटना से गिरफ्तार, सीआईडी की बड़ी कार्रवाई

 बोकारो की 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री मामले में सीआईडी ने मुख्य आरोपी शैलेश सिंह को पटना से गिरफ्तार किया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का खेल सामने आया।


Bokaro Forest Land Scam बोकारो: बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा स्थित 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री मामले में सीआईडी को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता शैलेश सिंह को पटना से गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को उसे रांची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

Bokaro Forest Land Scam:फर्जी दस्तावेजों से तैयार की गई पूरी साजिश

सीआईडी की जांच के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। आरोप है कि शैलेश सिंह ने रजिस्ट्री कार्यालय के कुछ कर्मियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और तीन पावर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम करवा लिए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने अपने बेटे आयुष सिंह और ललन सिंह की कंपनी उमायुष मल्टीकॉम के नाम 74 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करा दी।


Key Highlights

  • बोकारो की 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि घोटाले में मुख्य आरोपी शैलेश सिंह गिरफ्तार।

  • सीआईडी ने पटना से गिरफ्तार कर रांची की विशेष अदालत में किया पेश।

  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 74 एकड़ जमीन कंपनी के नाम रजिस्ट्री कराने का आरोप।

  • बिना वन भूमि की एनओसी के म्यूटेशन होने का मामला जांच में आया।

  • 3.40 करोड़ रुपये में जमीन बेचने का आरोप, सीआईडी आगे की जांच में जुटी।


Bokaro Forest Land Scam:बिना एनओसी हुआ म्यूटेशन, करोड़ों में हुई बिक्री

जांच में यह भी सामने आया है कि संरक्षित वन भूमि होने के बावजूद आवश्यक वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के बिना ही जमीन का म्यूटेशन कर दिया गया। इसके बाद उमायुष मल्टीकॉम ने यह जमीन राजबीर कंस्ट्रक्शन को लगभग 3.40 करोड़ रुपये में बेच दी।

सीआईडी अब इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मियों, म्यूटेशन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध जमीन हस्तांतरण में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही और सरकारी नियमों की अनदेखी कैसे हुई।

 

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