Jharkhand Scholarship 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजनाओं के तहत केंद्रीय सहायता बढ़ाने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां राज्य सरकार शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं केंद्रीय सहायता का मौजूदा स्तर वास्तविक जरूरतों के हिसाब से कम है।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बताया
अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड सरकार शिक्षा को सामाजिक समानता और आर्थिक विकास हासिल करने का सबसे प्रभावी साधन मानती है। राज्य का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के किसी भी छात्र की शिक्षा पैसों की कमी के कारण बाधित न हो; इसके लिए राज्य सरकार विभिन्न स्कॉलरशिप योजनाएं लागू करती है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण आबादी है, लाखों छात्रों की शिक्षा जारी रखने में स्कॉलरशिप योजनाएं अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए, इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलना जरूरी है।
आय के आधार पर दी जाती हैं स्कॉलरशिप
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में स्कॉलरशिप छात्रों के माता-पिता की सालाना आय के आधार पर दी जाती है, न कि किसी खास समुदाय से संबंधित होने के आधार पर। उन्होंने बताया कि भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बड़ी संख्या के कारण राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि राज्य में पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी है, लेकिन इस श्रेणी के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की सहायता उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
राज्य सरकार पर अधिक वित्तीय बोझ
2024-25 और 2025-26 के वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की तुलना में स्कॉलरशिप योजनाओं पर अधिक खर्च किया है। उन्होंने केंद्र से पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना के तहत झारखंड के लिए ‘नोशनल एलोकेशन’ (संभावित आवंटन) बढ़ाने का अनुरोध किया ताकि सभी पात्र छात्रों को समय पर स्कॉलरशिप मिल सके और उनकी शिक्षा बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
ST और अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप को लेकर चिंताएं
मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि झारखंड को 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में इस स्कीम के लिए केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिला है, और पिछले सालों में मंज़ूर की गई रकम भी पूरी तरह से जारी नहीं की गई है। इस स्थिति से हज़ारों स्टूडेंट्स की पढ़ाई में रुकावट आने का खतरा है। इसके अलावा, उन्होंने माइनॉरिटी कम्युनिटी के स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप स्कीम का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2021-22 से इस स्कीम के लिए कोई फंड नहीं दिया है, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर स्टूडेंट्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछड़े राज्यों के लिए खास पॉलिसी की मांग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्कॉलरशिप स्कीम के लिए केंद्रीय मदद बढ़ाने के लिए एक पॉलिसी बनाएं। उन्होंने कहा कि इससे झारखंड और दूसरे राज्यों के लाखों योग्य स्टूडेंट्स को समय पर स्कॉलरशिप मिल सकेगी, जिससे वे बिना किसी आर्थिक रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। साथ ही, इस कदम से सामाजिक समानता और समावेशी विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मज़बूती मिलेगी।
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