Jairam Mahato Bail News: डुमरी के विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो को बोकारो जिले के सियालजोरी में वेदांता स्टील प्लांट में हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में कोर्ट से राहत मिली है। शुक्रवार को उन्होंने धनबाद की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में सरेंडर किया; इसके बाद, कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी। यह सुनवाई स्पेशल जज दुर्गेश चंद्र अवस्थी की कोर्ट में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने विधायक को ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
स्पेशल MP-MLA कोर्ट में सुनवाई
जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई स्पेशल कोर्ट में जयराम महतो ने सरेंडर किया। उनकी ओर से वकील चंचल बनर्जी ने दलील दी कि विधायक का इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है और उन्हें हालात और राजनीतिक कारणों से आरोपी बनाया गया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सत्येंद्र कुमार राय ने ज़मानत याचिका का विरोध किया और इसे खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ज़मानत दे दी।
नवंबर 2023 में FIR दर्ज
यह मामला केस नंबर 118/23 से जुड़ा है, जो 27 नवंबर 2023 को बोकारो जिले के सियालजोरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता रवि कुमार आनंद द्वारा दर्ज कराई गई FIR में जयराम महतो, पार्वती चरण महतो, राथू महतो, सुभाष महतो और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वेदांता स्टील प्लांट में मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ऐसे बैनर और पोस्टर दिखाए गए जिन पर जयराम महतो की तस्वीर थी। इस विरोध-प्रदर्शन के कारण वेदांता फोर-लेन रोड पर भारी जाम लग गया, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ और कथित तौर पर कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ।
मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा मामला
FIR के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मज़दूर प्लांट के बाहर जमा हुए थे। सड़क जाम होने के कारण औद्योगिक गतिविधियां और ट्रांसपोर्टेशन का काम बाधित हुआ। शिकायतकर्ता ने कई लोगों को आरोपी बनाया था और आरोप लगाया था कि यह आंदोलन पहले से तय योजना के तहत किया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में यह मामला कोर्ट में सुनवाई के लिए आया।
जयराम महतो पहले भी कोर्ट में पेश हो चुके हैं
जयराम महतो इस मामले में पहले भी 18 जुलाई, 2025 को कोर्ट में पेश हुए थे। उस समय उन्होंने कहा था कि जिस दिन आंदोलन हुआ, वे उस जगह पर मौजूद नहीं थे। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी तस्वीर वाले बैनर का इस्तेमाल किया था, और इसी आधार पर उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति की तस्वीर बैनर पर होने से ही यह साबित नहीं हो जाता कि वे उसमें शामिल थे।
न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी
यह मामला बोकारो सिविल कोर्ट में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में इसे धनबाद की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया, क्योंकि इसमें एक जन-प्रतिनिधि शामिल था। हालांकि जमानत मिलने के बाद जयराम महतो को राहत मिल गई है, लेकिन मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहा है। आरोपों के सही या गलत होने पर अंतिम फैसला कोर्ट तभी करेगा जब सुनवाई पूरी हो जाएगी और सबूतों व गवाहों की जांच हो जाएगी।
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