Coal India Incentive Scheme, धनबाद: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और उसकी सहायक कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। कंपनी ने वैधानिक दक्षता प्रमाणपत्र हासिल करने वाले पात्र कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि देने की नयी व्यवस्था लागू की है। कोल इंडिया बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, निर्धारित वैधानिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने और योजना की शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को एकमुश्त एक लाख रुपये का इंसेंटिव दिया जायेगा। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि इस पहल से कर्मचारियों को वैधानिक दक्षता प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही खनन कार्यों से जुड़े तकनीकी और वैधानिक पदों पर योग्य तथा प्रमाणित मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कोल इंडिया और सभी सहायक कंपनियों में लागू होगी योजना
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था कोल इंडिया लिमिटेड के साथ उसकी सभी अनुषंगी कंपनियों में लागू की जायेगी। योजना में पात्रता, मान्य प्रमाणपत्रों की श्रेणी और इंसेंटिव भुगतान से संबंधित शर्तों को स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना है, जो निर्धारित तकनीकी और वैधानिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र रखते हों। कंपनी को उम्मीद है कि इससे महत्वपूर्ण पदों पर प्रमाणित कर्मियों की कमी को दूर करने में सहायता मिलेगी।
इन प्रमाणपत्रों पर मिलेगा एक लाख रुपये का लाभ
कार्यालय ज्ञापन में कई वैधानिक दक्षता प्रमाणपत्रों को योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न प्रमाणपत्र शामिल हैं:
- इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजरी सर्टिफिकेट
- अनरिस्ट्रिक्टेड सरदार सर्टिफिकेट ऑफ कंपीटेंसी
- माइन सर्वेयर सर्टिफिकेट ऑफ कंपीटेंसी
इनमें से निर्धारित प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले पात्र कर्मचारियों को आवश्यक शर्तें पूरी करने के बाद एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। कंपनी का मानना है कि प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से खनन और तकनीकी गतिविधियों में वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने के लिए आवश्यक दक्षता उपलब्ध होगी।
पहले से प्रमाणपत्र हासिल कर चुके कर्मचारी भी पात्र हो सकते हैं
नयी व्यवस्था में उन कर्मचारियों के लिए भी अवसर रखा गया है, जिन्होंने संबंधित वैधानिक दक्षता प्रमाणपत्र पहले ही हासिल कर लिया है, लेकिन अब तक उसे कंपनी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रमाणपत्र जमा करना होगा। इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रमाणपत्र, पात्रता और योजना की अन्य शर्तों की जांच की जायेगी। जांच में पात्र पाये जाने पर पहले से प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके कर्मचारियों को भी इंसेंटिव का लाभ मिल सकता है।
सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, वैधानिक पद पर योगदान भी जरूरी
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि केवल वैधानिक दक्षता प्रमाणपत्र हासिल कर लेना प्रोत्साहन राशि पाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित प्रमाणपत्र के आधार पर कर्मचारी का वैधानिक पद पर चयन या तैनाती होना और उस पद पर योगदान देना भी आवश्यक होगा। इसका अर्थ है कि इंसेंटिव का भुगतान प्रमाणपत्र प्राप्त करने के साथ-साथ निर्धारित पद से जुड़ी जिम्मेदारी संभालने की शर्त पर निर्भर करेगा। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि प्रमाणपत्र का वास्तविक उपयोग कंपनी के परिचालन और वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करने में हो।
शर्तों का पालन नहीं करने पर हो सकती है राशि की वसूली
कार्यालय ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी इंसेंटिव प्राप्त करने के बाद निर्धारित वैधानिक पद पर योगदान नहीं देता है या योजना में तय शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उससे प्रोत्साहन राशि की वसूली की जा सकती है। कंपनी प्रबंधन को उम्मीद है कि इस योजना से कर्मचारियों में तकनीकी योग्यता और वैधानिक प्रमाणपत्र हासिल करने की रुचि बढ़ेगी। इससे कर्मचारियों को कैरियर उन्नयन का अवसर मिलेगा और कोल इंडिया को भी प्रशिक्षित, योग्य तथा प्रमाणित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। योजना का उद्देश्य कर्मचारियों के कौशल विकास और खनन कार्यों की वैधानिक जरूरतों, दोनों को मजबूत करना है।
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