Gaya Ji Paint the City: पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 को लेकर गयाजी में तैयारियां तेज हो गयी हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए शहर को सजाने-संवारने के साथ-साथ बिहार की पारंपरिक लोककलाओं को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसी क्रम में ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम के तहत गयाजी की प्रमुख दीवारों और घाटों को मधुबनी तथा मंजूषा पेंटिंग से सजाया जा रहा है। इन चित्रों के माध्यम से पितृपक्ष की धार्मिक परंपरा, गयाजी की सांस्कृतिक विरासत और बिहार के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह पहल शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ कलाकारों और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी दे रही है।
‘पेंट द सिटी’ से कलाकारों को मिला अपनी कला दिखाने का अवसर
मानपुर के लखीबाग की रहने वाली चाहत वत्स ने इस पहल के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने बताया कि ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम के तहत कलाकारों से पेंटिंग ईमेल के माध्यम से मंगायी गयी थी। उनकी पेंटिंग का चयन होने के बाद उन्हें शहर की दीवार पर उसे बनाने का अवसर मिला। चाहत के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान कलाकारों को पेंटिंग से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी गयी। इसके अलावा नाश्ता, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि अपनी कला को सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित करने का अवसर उनके लिए विशेष अनुभव है।
पितृपक्ष की धार्मिक विरासत को चित्रों में उकेरा गया
रामधनपुर, कबड़ापर और शिव मंदिर के पास रहने वाली तान्या ने भी ‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि जिला पदाधिकारी द्वारा उनकी पेंटिंग का चयन किया गया और उन्हें एक दीवार पर चित्र बनाने की जिम्मेदारी दी गयी। तान्या की पेंटिंग की थीम ‘गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु का आशीर्वाद’ है। इस चित्र के माध्यम से गयासुर की तपस्या और भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक प्रसंग को दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान आवश्यक सामग्री और भोजन की व्यवस्था की गयी। साथ ही शिक्षिकाओं की मौजूदगी में यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। तान्या के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए ऐसे मंच कम ही मिलते हैं।

आईआईएम बोधगया की छात्राओं ने भी लिया हिस्सा
‘पेंट द सिटी’ कार्यक्रम में आईआईएम बोधगया की छात्राओं ने भी भाग लिया। छात्रा विदुषी मौर्य ने बताया कि इसी वर्ष उनका आईआईएम बोधगया में दाखिला हुआ है। पितृपक्ष के अवसर पर अपनी टीम के साथ पेंटिंग गतिविधि में शामिल होकर वह उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों को इस पवित्र अवसर पर कला के माध्यम से पितृपक्ष की महत्ता प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है। विदुषी और उनकी टीम की पेंटिंग में राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ी कथा को दर्शाया गया है। उनका उद्देश्य पितृपक्ष और पिंडदान की परंपरा को चित्रों के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाना है। साथ ही वे चाहती हैं कि उनकी कला गयाजी की सुंदरता में भी योगदान दे।

मधुबनी और मंजूषा कला से बढ़ रही शहर की खूबसूरती
गयाजी की दीवारों पर बनायी जा रही पेंटिंग्स में बिहार की पारंपरिक लोककला की झलक दिखाई दे रही है। मधुबनी और मंजूषा चित्रकला में लोकजीवन, धार्मिक प्रसंगों, प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक आकृतियों का इस्तेमाल किया जाता है। सार्वजनिक दीवारों पर ऐसी पेंटिंग बनाने से शहर का वातावरण अधिक आकर्षक बनता है। साथ ही लोगों को बिहार की समृद्ध कला और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है। इससे स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों को भी अपनी रचनात्मकता सामने रखने का मंच मिलता है।
पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 को लेकर विशेष तैयारी
गयाजी में पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 का आयोजन 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक होना है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालु पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना से पिंडदान तथा तर्पण अनुष्ठान करते हैं। मेला अवधि में प्रशासन की ओर से आवास, सामुदायिक भोजन, स्वास्थ्य शिविर और यातायात प्रबंधन जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है। शहर की दीवारों और प्रमुख स्थलों को लोककला से सजाने की पहल इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है। पेंटिंग के जरिये गयाजी की धार्मिक पहचान, पितृपक्ष की आस्था और बिहार की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव के साथ-साथ स्थानीय कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।
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