सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमित होने से पहले की Contract, Ad-hoc, Daily Wage और Work Charge सेवा को पेंशन के लिए Qualifying Service माना जा सकता है।
Supreme Court Judgment नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पेंशन और रिटायरमेंट लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि नियमित होने से पहले कॉन्ट्रैक्ट, एडहॉक, डेली वेज या वर्क चार्ज के आधार पर की गयी सेवा को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए क्वालिफाइंग सर्विस माना जाना चाहिए।
Supreme Court Judgment: वर्षों की सेवा को तकनीकी आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि यदि कर्मचारियों ने वर्षों तक लगातार सेवा दी है, तो केवल तकनीकी कारणों के आधार पर उन्हें पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
Supreme Court Judgment: Service Gap के आधार पर पेंशन रोकने पर आपत्ति
अदालत ने कहा कि सेवा में आये बनावटी या अदालती गैप को आधार बनाकर कर्मचारियों को पेंशन लाभ से वंचित करना उचित नहीं है। नियमित नियुक्ति से पहले की वास्तविक सेवा को भी परिस्थितियों के अनुसार महत्व दिया जाना चाहिए।
Key Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को लेकर अहम फैसला दिया।
- Contract और Ad-hoc Service को Qualifying Service माना जा सकता है।
- Daily Wage और Work Charge सेवा भी पेंशन गणना में शामिल हो सकती है।
- तकनीकी सर्विस गैप के आधार पर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
- पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की अपील खारिज हुई।
Supreme Court Judgment: पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की अपील खारिज
पीठ ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की अपील खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। फैसले से लंबे समय तक अस्थायी आधार पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।


















