CCL Employee Case: झारखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश किया रद्द, 12 सप्ताह में सभी रिटायरमेंट लाभ देने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने सीसीएल कर्मचारी अभय कुमार की बर्खास्तगी रद्द करते हुए 12 सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति और वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया।


CCL Employee Case रांची: रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के एक कर्मचारी की बर्खास्तगी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सीसीएल द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता अभय कुमार को 12 सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य वित्तीय देयकों का भुगतान करे।

CCL Employee Case:विभागीय जांच में केवल दस्तावेज पर्याप्त नहीं

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विभागीय जांच एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसमें केवल दस्तावेज पेश कर आरोप सिद्ध नहीं किए जा सकते। संबंधित दस्तावेजों की सत्यता और प्रामाणिकता की पुष्टि ऐसे गवाह द्वारा की जानी चाहिए, जिसे मामले की जानकारी हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौखिक गवाही के अभाव में केवल कागजी साक्ष्यों के आधार पर किसी कर्मचारी को दोषी ठहराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निष्पक्ष प्रक्रिया का उल्लंघन है।

CCL Employee Case:बिना ठोस साक्ष्य के बर्खास्तगी को बताया गैरकानूनी

हाईकोर्ट ने माना कि अभय कुमार के खिलाफ विभागीय जांच में प्रबंधन की ओर से एक भी मौखिक गवाह पेश नहीं किया गया। ऐसे में बिना ठोस साक्ष्य के उन्हें दोषी ठहराकर सेवा से हटाना पूरी तरह गैरकानूनी था। चूंकि अभय कुमार दिसंबर 2021 में सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुके हैं, इसलिए अदालत ने बर्खास्तगी और अपीलीय आदेश दोनों को निरस्त करते हुए उनकी रिट याचिका स्वीकार कर ली।


Key Highlights:

  • झारखंड हाईकोर्ट ने सीसीएल की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया।

  • 12 सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति और वित्तीय लाभ देने का निर्देश।

  • अदालत ने कहा, मौखिक गवाही के बिना विभागीय जांच अधूरी मानी जाएगी।

  • केवल दस्तावेजों के आधार पर बर्खास्तगी को बताया गैरकानूनी।

  • 39 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति से ठीक पहले की गई थी कार्रवाई।


CCL Employee Case:39 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति से पहले हुई थी कार्रवाई

अभय कुमार की नियुक्ति 19 जून 1980 को उनकी मां की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सीसीएल की दोरी कोलियरी में हुई थी। उन्होंने करीब 39 वर्षों तक सेवा दी। वर्ष 2019 में सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उन्हें आरोपपत्र दिया गया। आरोप था कि उन्होंने स्वयं को जगदेव भुइयां का पुत्र बताकर गलत तरीके से नौकरी प्राप्त की थी। जांच अधिकारी ने 18 बैठकों में सुनवाई की, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई मौखिक गवाह पेश नहीं किया गया। इसके बावजूद दिसंबर 2021 में, सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।


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