Bihar Agrivoltaics Solar Energy : बिहार में कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन की तकनीक को उपयोगी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस-2026 में इस तकनीक की संभावनाओं पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स के माध्यम से कृषि भूमि पर फसल उत्पादन के साथ स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकता है। मंत्री के अनुसार, कृषि प्रधान बिहार में इस तकनीक से किसानों को आय के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
क्या है एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक?
एग्रीवोल्टाइक्स ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही भूमि पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ संचालित करने की व्यवस्था की जाती है। इसके तहत सोलर पैनलों की स्थापना इस तरह की जा सकती है कि उपयुक्त परिस्थितियों में उनके नीचे या आसपास कृषि गतिविधियां जारी रहें। इस तकनीक का उद्देश्य कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करना और किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर विकसित करना है। हालांकि, इसकी सफलता फसलों के प्रकार, सोलर पैनलों की ऊंचाई और दूरी, उपलब्ध धूप, पानी तथा स्थानीय कृषि परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस-2026 में हुई चर्चा
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘पावरिंग द ग्लोबल साउथ’ था। इसमें विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ आगे बढ़ाने की संभावनाओं, आधुनिक तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा का प्रमुख उद्देश्य कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के नए रास्ते तलाशना रहा।

किसानों को अतिरिक्त आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि भूमि पर खाद्यान्न उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा पैदा करना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का आधार बन सकता है। इससे पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। एग्रीवोल्टाइक्स मॉडल के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं से होने वाली संभावित आय के अलावा खेती जारी रखने का अवसर भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, यह परियोजना की लागत, बिजली की बिक्री की व्यवस्था, फसल उत्पादन और रखरखाव जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

हरित भविष्य के निर्माण पर सरकार का जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भारत पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’ बनाने की सोच का उल्लेख करते हुए स्वच्छ ऊर्जा और कृषि के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक की संभावनाओं पर आगे काम होने से खेती, ऊर्जा उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।


















