Pakur पानी की जंग- हिरणपुर प्रखंड के केंदुआ पंचायत स्थित धरनी पहाड़ पहाड़िया समुदाय के आदिवासियों का बसेरा है.

इस गांव में विलुप्त होने के कगार पर खड़े दर्जनों पहाड़िया परिवार रहते हैं.
गांव में आधारभूत संरचना का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि
आजादी के 75 वर्ष बाद भी इन परिवारों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं है.
ये परिवार एक एक बूंद पानी के लिए एक जंग लड़ते हैं,
आजादी के 75 साल बाद भी मयस्सर नहीं पानी के दो घूंट
यह कहानी कोई आज की नहीं है, वर्षों से इस गांव की यही हालत है.
काफी कोशिश और हंगामें के बाद यहां एक जलमीनार लगाया गया था,
आशा बनी थी कि इसके बाद इन पहाड़िया परिवारों को पानी की यह जंग खत्म हो जाएगी.
लेकिन यहां भी किस्मत दगा दे गयी. जिस जोर शोर से जलमीनार की चर्चा और दावे किये गये,
वह सिर्फ संवेदक की कमाई का जरिया बन गया.
आज तक ग्रामीणों ने इस जलमीनार का पानी नहीं पिया.
पानी की जंग–चुंआ का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीण आज भी चुंआ का पानी पीकर अपनी प्यास को बुझा रहे हैं.
ग्रामीण का कहना है कि यहां का जलस्तर काफी नीचे जा चुका है.
गांव में कोई आहर पोखर या तालाब नहीं है, हां एक कुंआ जरुर है, उसका पानी काफी गंदा है,
लेकिन मजबूरी में नहाने के काम आता है, गंदे पाने में नहाने से कई बीमारियां भी होती है,
चुंआ का पानी भी पीने के योग्य नहीं है. लेकिन कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है.
रिपोर्टर:- संजय कुमार सिंह पानी की जंग
Chatra Acid Attack case- फांसी और सिर्फ फांसी यही है उसकी सजा- आरोपी का पिता
Highlights

















