स्थानीयता और ओबीसी आरक्षण पर धोखा देने की तैयारी में हेमंत सरकार: रघुवर दास

Ranchi-पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि हेमंत सरकार स्थानीयता और ओबीसी आरक्षण पर धोखा देने की तैयारी कर रही है.

उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि

राज्य सरकार इस विशेष सत्र के दौरान स्थानीय नीति के तौर पर

1932 या 1965 का खतियान लागू करने की योजना बना रही है.

जबकि 23  मार्च 2022 को हेमंत सोरेन ने स्वयं विधानसभा में यह घोषणा की थी कि

1932 के आधार पर स्थानीय नीति नहीं बनाई जा सकती है.

फिर अचानक ऐसा क्यों है कि उनके मन में परिवर्तन हो गया, यह समझने वाली बात है.

स्थानीयता और ओबीसी आरक्षण पर धोखा देने की कोशिश नहीं करें हेमंत

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि हेमंत सोरेन को यह राय दी गई है कि

वे नियुक्तियों के संबंध में 1932 के खतियान के आधार

मूलवासियों को दिए जाने वाले किसी प्रकार के आरक्षण की घोषणा नहीं करें.

वह सिर्फ 1932 खतियान के आधार पर स्थानीयता की घोषणा कर दें.

ताकि 1932 के खतियान की घोषणा भी हो जाए और नियुक्तियों में आरक्षण की बात भी नहीं हो

और इस तरह राज्य के मूलवासियों को धोखा दिया जा सके. लेकिन यदि हेमंत सोरेन इसे लागू करना चाहते हैं तो

सभी प्रकार की घोषणा एक साथ ही करें, आदिवासी मूलवासियों को धोखा देने की कोशिश नहीं करें.

भाजपा की सरकार में माननीय उच्च न्यायालय के स्थानीय नीति के विषय पर दिए गए निर्णय को दृष्टिगत रखते हुए

राज्य की वर्ग तीन तथा चार की सभी नियुक्तियों को राज्य के स्थानीय अथवा मूलवासियों के लिए आरक्षित किया था.

हजारों की संख्या में उस प्रकार नियुक्तियां भी की गई,

लेकिन झामुमो कांग्रेस सरकार माननीय न्यायालय के समक्ष उन लाभकारी नीतियों को बताने में असफल रही

और अब उससे भी बढ़कर 1932 के खतियान का धोखा देने की तैयारी कर रही है.

अगर 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति निर्धारित करने की बात सोची गयी है

स्थानीयता और ओबीसी आरक्षण पर खेल खेल रही हेमंत सरकार

राज्य के पिछड़े वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण की प्रतिशत में वृद्धि की घोषणा की भी बात की जा रही है.

परंतु मुझे इस मामले में भी राज्य सरकार की नियत पर गंभीर संदेह है.

हमारी सरकार ने आरक्षण देने के लिए सर्वे का कार्य शुरू कराया था,

वह हेमंत सोरेन की सरकार के द्वारा बंद करवा दियाा गया.

फिर बगैर सर्वे के आरक्षण कैसे दिया जा सकेगा.

मेरे कार्यकाल में ही पिछड़ा वर्ग आयोग को उक्त संबंध में आंकड़ा एकत्रित करने का आग्रह किया गया था

और मेरी जानकारी में पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी सिफारिश भी वर्तमान सरकार को काफी पहले ही सौंप दी है

परंतु वर्तमान सरकार के द्वारा विगत ढाई वर्षों में पिछड़े वर्गों को दिए जाने वाले

आरक्षण के प्रतिशत में बढ़ोतरी के लिए अन्य अनिवार्य प्रक्रिया नहीं पूरी की गई है.

अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इंदिरा साहनी के मामले में

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए न्याय निर्णय

और 50% की सीमा का किस प्रकार से निराकरण किया गया है.

बहुसंख्यक पिछड़ा वर्ग को लॉलीपॉप नहीं दिखलायें हेमंत

तो क्या इस मामले में भी झामुमो कांग्रेस की सरकार राज्य के

बहुसंख्यक पिछड़ा वर्गों को लॉलीपॉप दिखाने का काम करेगी.

क्या यह भी एक चुनावी घोषणा के समान है कि जब कुर्सी जाने को बारी आई

तो जबरदस्ती कागजी घोषणा की जा रही है.

मैं सरकार की ऐसी योजना का स्वागत करता हूं, परंतु इसमें ईमानदारी की उम्मीद करता हूँ.

वास्तव में झारखंड राज्य में पिछड़े वर्ग से आने वाले नागरिकों की संख्या अत्यधिक है

और उन को दिया जाने वाला आरक्षण काफी कम.

पिछड़ों का आरक्षण बढ़ाये सरकार

अतः राज्य के पिछड़े वर्गों को दिया जाने वाला आरक्षण जरूर बढ़ाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन को अभी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है.

अब जब उनकी कुर्सी खतरे में है, तब मात्र दिखावे के लिए और राज्य की भोली भाली जनता को धोखा देने के लिए

एक प्रपंच रचा गया है ताकि उनकी घोषणा भी हो जाए और राज्य की जनता को कुछ हासिल भी ना हो सके.

उन्होंने ने कहा कि आप एक संवैधानिक कुर्सी पर बैठे हैं और आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि

आप जो भी घोषणा करें उसका लाभ राज्य की जनता को मिल सके.

आप कोई भी धोखा या छलावा देने की घोषणा करने से बचें,

क्योंकि आपकी सरकार ने विगत ढाई वर्षों में राज्य की जनता को अंधेरे में रखकर सिर्फ लूट को अंजाम दिया है

जिसका परिणाम भुगतने की अब बारी है.

विश्वास मत हासिल करने की बेचैनी क्यों?

खबरों के अनुसार हेमंत सरकार 5 सितंबर को विधानसभा का विशेष सत्र में बहुमत साबित करेगी.

विश्वास मत हासिल करने के लिए ना तो विपक्ष ने मांग की है, न ही राज्यपाल ने निर्देश दिया है.

फिर फ्लोर का इस प्रकार दुरुपयोग क्यों किया जा रहा है? इसमें लाखों रुपए खर्च होंगे,

इसका बोझ राज्य की जनता पर पड़ेगा.

विगत ढाई वर्षों में झामुमो कांग्रेस की सरकार ने कोयला, बालू, गिट्टी की लूट की

और शराब के व्यापार में और साथ ही ट्रांसफर पोस्टिंग का धंधा चलाकर हजारों करोड़ रुपए की उगाही की है.

यहां तक की मुख्यमंत्री ने अपने और अपने परिवार वालों अथवा लोगों के नाम पर लीज भी ली.

जिसका परिणाम है कि मुख्यमंत्री तथा उनके परिवार वाले तथा सहयोगी केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर है।

धोखा है 1932 का खतियान-रघुवर दास

Sharad Purnima 2026: रांची में 25 अक्टूबर को कोजागरी और लक्ष्मी...

शरद पूर्णिमा पर रांची में 25 अक्टूबर को व्रत, कोजागरी और लक्खी पूजा होगी। 26 अक्टूबर को स्नान-दान, सत्यनारायण कथा और मंदिरों में विशेष...

Ranchi Flight Fare: दिवाली से पहले हवाई किराया ढाई से तीन...

 दिवाली से पहले रांची आने वाली उड़ानों का किराया तेजी से बढ़ा। भुवनेश्वर से रांची का टिकट 25,665 रुपये तक पहुंचा, जबकि दिल्ली, मुंबई...

Bihar News: मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये देगा इंडियन...

 बिहार में इंडियन मोशन पिक्चर प्रोडक्शन एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये दिए। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने भी एक...