गयाः खेती के साथ साथ कई किसानों के जीवनयापन का जरिया पशुपालन है..और इन पशुओं का आहार है हरी घास.. ऊपर से बाजार में पशुओं का आहार महंगी है.. लिहाजा पशुपालन में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.. ऐसे में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए वरदान होता है।

अजोला(Ajola)..आपके लिए अजोला घास अचरज का नाम हो सकता है..लेकिन गया के किसानों के लिए अजोला बिल्कुल भी नया नाम नहीं.. पशुओं के लिए ये बेहतर चारा है.. उन पशुओं के लिए तो और भी बेहतर जिन्हें साल भर हरा चारा नहीं मिल पाता है।
अजोला में 25-30 प्रतिशत तक प्रोटीन, पशुओं के लिए इतना फायदेमंद है कि…
जी..बिल्कुल कम लागत..अजोला के उत्पादन के लिए 2 से 3 रुपये किलो की लागत आती है.. मुनाफा प्रति किलो लगभग 500 रुपये तक.. गया के किसान अजोला की खेती से खूब मुनाफा कमा रहे हैं। बंजर जमीन या किसी खाली जगह पर आसानी से अजोला का उत्पादन किया जा सकता है।

बस जमीन से 5 से 10 सेंटीमीटर ऊंचे जलस्तर की जरूरत होती है..और तैयार हो जाता है.. अजोला…अजोला में 25 से 30 प्रतिशत तक प्रोटिन पाया जाता है..लिहाजा दूसरे चारे की तुलना में अजोला पशुओं के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
बंजर जमीन पर भी उगा सकते हैं अजोला..गाय, भैंस, बत्तख, मुर्गी सभी के लिए वरदान
एक खास किस्म की चारा…कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में अजोला का उपयोग खास है। दोनों ही जगहों पर इसकी खास उपयोगिता है। जीरो बजट में अजोला पशुओं के लिए बड़े ही काम का है। गया में अजोला की खेती कर रहे किसान कम लागत में खूब मुनाफा कमा रहे हैं।
बाजार में जहां पशुओं के लिए चारा महंगी है तो कई महीनों तक इन पशुओं को हरा घास मिल नहीं पाता.. लिहाजा अजोला पशुओं के साथ-साथ पशुपालन करने वाले किसानों के लिए वरदान है। ऊपर से इस घास को गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी, बत्तख सभी तरह के पशु और पक्षियों को खिला सकते हैं।


















