जमुई में अरुण भारती या अर्चना रविदास, जनता किसे देगी मौका ?

आज हम बातें करेंगे जमुई लोकसभा सीट की. जमुई में चुनाव पहले फेज में 19 अप्रैल को हो रहे हैं.

जमुई बीते 10 सालों से चिराग पासवान की सीट है लेकिन अब 2024 के चुनाव में चिराग ने इस सीट से अपने बहनोई अरुण भारती को उतारा है. अरुण भारती के लिए यह पहला चुनाव होगा. अरुण पेशे से बिजनेस मैन हैं, उन्होंने इंग्लैंड से एमबीए की डिग्री हासिल की है. हालांकि उनका परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है. अरुण भारती की मां डॉक्टर ज्योति बिहार सरकार में मंत्री, दो बार विधायक और दो बार विधान पार्षद भी रह चुकी हैं.

अरुण भारती के सामने चुनावी मैदान में महागठबंधन की ओर से राजद का प्रत्याशी होगा. राजद ने अरुण भारती के सामने अर्चना रविदास को चुनावी मैदान में उतारा है. अर्चना रविदास पोस्ट ग्रेजुएट हैं, अरुण भारती की तरह ही अर्चना भी पहली बार ही चुनावी मैदान में उतरी हैं.

जमुई एससी आरक्षित सीट है यहां 6 विधानसभा की सीटें हैं. इन सीटों में तारापुर, शेखपुरा, सिकंदरा, जमुई, झाझा, चकाई शामिल है.

सीएस आई 10 22Scope News

तारापुर से राजीव सिंह जदयू के विधायक हैं. शेखपुरा में राजद का कब्जा है वहां से विजय यादव विधायक है. सिकंदरा से हम के प्रफुल्ल मांझी,जमुई से भाजपा की श्रेयसी सिंह विधायक हैं. बता दें श्रेयसी सिंह स्पोर्ट्स वुमन हैं उन्होंने निशानेबाजी में कई पदक देश के लिए जीते हैं. श्रेयसी दिग्गज नेता दिग्गविजय सिंह की बेटी है. झाझा विधानसभा सीट पर जदयू का कब्जा है यहां से दामोदर रावत विधायक हैं. वहीं चकाई से सुमित सिंह निर्दलीय विधायक हैं.

जमुई लोकसभा के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो यहां यादव, पासवान और राजपूत वोट सबसे अधिक है और ये वोटर यहां निर्णायक भूमिका में है.

जमुई लोकसभा क्षेत्र के इतिहास पर एक नजर डालें तो जमुई लोकसभा में चुनाव 1952 में शुरु हो गए थे जो 1971 तक चला लेकिन 1977 से लोकर 2004 के लोकसभा चुनाव तक ये सीट अस्तित्व में नहीं था. 2009 में जमुई लोकसभा में चुनाव फिर से शुरु हुए और जदयू के भूदेव चौधरी सांसद बने जबकि 2014 और 2019 में गठबंधन में ये सीट लोजपो को गया और चिराग पासवान सांसद बने.

1952 के लोकसभा चुनाव में जमुई से कांग्रेस के बनारसी प्रसाद सिंहा जीते थे. जिसके बाद के दो चुनावों में भी कांग्रेस ने जमुई में अपना परचम लहराया. 1962 और 1967 के चुनाव में जमुई से नयन तारा दास कांग्रेस के टिकट पर जीते.
1971 के चुनाव में जमुई में भोला मांझी ने कांग्रेस के जीत को रोका, भोला मांझी ने भारतीय कम्युनिष्ठ पार्टी से जीत हासिल की.

जिसके बाद 1977 से 2004 में यह निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में नहीं रहा.

2009 में जमुई में जदयू ने जीत दर्ज की और भूदेव चौधरी सांसद बने.

2014 और 2019 के चुनाव में चिराग पासवान ने लोजपा का परचम लहराया.

अब चिराग पासवान 2024 के चुनाव में जमुई छोड़कर हाजीपुर से चुनाव लड़ने वाले हैं.

वहीं चिराग ने जमुई सीट पर इस बार अपने जीजा जी अरुण भारती को मौका दिया है. और राजद ने भी एम वाय वोटर्स को देखते हुए अर्चना रविदास को मैदान में उतारा है, अब देखना होगा कि जमुई की जनता किसे अपना समर्थन देगी और कौन दिल्ली पहुंचेगा.

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