JPSC भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में अभय तिवारी की जमानत पर 8 सितंबर को उसका पक्ष सुना जाएगा। CID ने अवैध गतिविधियों और पैसे के लेन-देन की जानकारी दी।
JPSC Exam Scam रांची: जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल में बंद अभय तिवारी की जमानत याचिका पर बुधवार को अपर न्यायायुक्त प्रथम सह सीआईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। सीआईडी की ओर से अधिवक्ता मनोज और सिद्धार्थ ने बहस पूरी करते हुए जमानत का विरोध किया।
अब आठ सितंबर को अभय तिवारी की ओर से अदालत में अपना पक्ष रखा जायेगा। सुनवाई के दौरान अभय तिवारी के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़े।
JPSC Exam Scam: दो अलग-अलग नाम से गतिविधियां चलाने का आरोप
सीआईडी ने अदालत को बताया कि अभय तिवारी कथित तौर पर दो अलग-अलग नामों से टीडीपीएल और जेपीएससी से जुड़ी गतिविधियां संचालित कर रहा था। एजेंसी के अनुसार टीडीपीएल में वह मनोज तिवारी के नाम से काम करता था।
सीआईडी ने बताया कि अभय तिवारी के जीमेल अकाउंट में दर्ज फोन नंबरों से इस संबंध में जानकारी सामने आयी है। एजेंसी ने अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी के कथित पैसे के लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी।
अभय तिवारी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रह चुका है। उस पर अपने सगे-संबंधियों समेत अन्य अभ्यर्थियों से पैसे लेकर नौकरी दिलाने का आरोप है।
Key Highlights
- JPSC भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में अभय तिवारी की जमानत पर सुनवाई हुई।
- CID ने अदालत में जमानत याचिका का विरोध किया।
- आठ सितंबर को अभय तिवारी की ओर से अदालत में पक्ष रखा जायेगा।
- CID के अनुसार अभय तिवारी टीडीपीएल में मनोज तिवारी के नाम से काम करता था।
- जांच एजेंसी ने पूर्व JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया है।
JPSC Exam Scam: पूर्व JPSC चेयरमैन की भूमिका का भी किया उल्लेख
सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता के मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार अभय तिवारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की कथित भूमिका का उल्लेख किया है। सीआईडी का दावा है कि अभय तिवारी ने बयान में कहा कि टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयनित कराने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका थी।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और जांच की आगे की प्रक्रिया के बाद ही सामने आयेगा।


















