Bihar Jivika Special Self Help Groups: बिहार में वृद्धजनों और दिव्यांगों के लिए बने 8,985 विशेष समूह, जीविका से मिलेगा स्वरोजगार का सहारा

Bihar Jivika Special Self Help Groups: बिहार में वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जीविका) विशेष स्वयं सहायता समूहों का गठन कर रही है। ग्रामीण विकास विभाग की इस पहल के तहत अब तक राज्य में दिव्यांगजनों के लिए 8,299 और तीन जिलों में वृद्धजनों के लिए 686 विशेष समूह बनाए गए हैं। इस तरह कुल 8,985 विशेष समूहों का गठन किया जा चुका है। इन समूहों के माध्यम से लाभार्थियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने इसे सामाजिक और आर्थिक न्याय को मजबूत करने वाली पहल बताया है।

8,985 विशेष समूहों से जुड़ेंगे वृद्धजन और दिव्यांगजन

जीविका का उद्देश्य वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर देना है। इसके लिए पुरुष, महिला और मिश्रित श्रेणियों में विशेष स्वयं सहायता समूह बनाए जा रहे हैं। विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन समूहों के सदस्यों को उनकी जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का लाभ दिलाने, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है। इससे लाभार्थियों को सामूहिक प्रयासों के जरिए आजीविका के साधन विकसित करने में मदद मिल सकती है।

2.42 लाख से अधिक दिव्यांगजन पहले से जीविका से जुड़े

जीविका के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 14 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क से लगभग 2.42 लाख दिव्यांगजन जुड़े हुए हैं। अब उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष समूहों के गठन पर जोर दिया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, दिव्यांगजनों के लिए गठित विशेष समूहों से 50,486 दिव्यांगजन जुड़े हैं। वहीं, वृद्धजनों के लिए बनाए गए विशेष समूहों से 8,559 लोग जुड़े हैं। इन समूहों के जरिए लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने की योजना है।

समूहों को मिलेगा 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड

विशेष स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियां शुरू करने और छोटे व्यवसाय विकसित करने में मदद देने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, नियमानुसार प्रत्येक पात्र समूह को 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड और 1.50 लाख रुपये का इनिशियल कैपिटलाइजेशन फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस सहायता से समूह के सदस्य अपनी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार छोटे कारोबार शुरू कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सामूहिक आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और आजीविका के नए साधन विकसित करना है।

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पेंशन, आधार कार्ड और सहायक उपकरणों में मिलेगी मदद

जीविका और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से वृद्धजनों तथा दिव्यांगजनों को आधार कार्ड, पैन कार्ड, पेंशन और अन्य पात्रता आधारित सरकारी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पटना स्थित सीसीआरसी के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को व्हीलचेयर, छड़ी, चश्मे और अन्य आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल भी की जा रही है। इसका मकसद सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाना और दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करने में सहायता करना है।

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कुटीर उद्योग और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता पर जोर

विशेष समूहों के सदस्यों को उनकी क्षमता, रुचि और जरूरतों के अनुरूप छोटे व्यवसायों तथा कुटीर उद्योगों से जोड़ने की तैयारी है। विभागीय जानकारी के अनुसार, दिव्यांगजनों के लिए लिफाफे और पेपर बैग बनाने जैसी उत्पादक इकाइयां विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इस पहल के तहत कौशल विकास, सामूहिक उद्यम और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि लाभार्थी अपनी क्षमता के अनुसार आय अर्जित कर सकें। ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जीविका के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए कार्य किए गए हैं। उन्होंने वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष स्वयं सहायता समूहों के गठन को समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Bihar Jivika Special Self Help Groups कितने बनाए गए हैं?

राज्य में अब तक दिव्यांगजनों के लिए 8,299 और तीन जिलों में वृद्धजनों के लिए 686 विशेष समूह बनाए गए हैं, जिससे कुल 8,985 विशेष समूहों का गठन हुआ है।

इन समूहों के माध्यम से लाभार्थियों को क्या सहायता मिलेगी?

लाभार्थियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, स्वरोजगार के अवसर और 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड तथा 1.50 लाख रुपये का इनिशियल कैपिटलाइजेशन फंड मिलेगा।

दिव्यांगजनों के लिए कौन सी आजीविका गतिविधियां विकसित की जा रही हैं?

दिव्यांगजनों के लिए लिफाफे और पेपर बैग बनाने जैसी उत्पादक इकाइयां विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा, उन्हें उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार छोटे व्यवसायों और कुटीर उद्योगों से जोड़ा जा रहा है।

पटना के CCRC के माध्यम से क्या सुविधाएं दी जा रही हैं?

जरूरतमंद लाभार्थियों को व्हीलचेयर, छड़ी, चश्मे और अन्य आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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