Bokaro IFMS Scam: 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि बदली, 15.98 करोड़ की अवैध निकासी का खुलास!

 बोकारो में IFMS घोटाला उजागर, 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि और 5037 की योगदान तिथि बदली गई। 15.98 करोड़ रुपये की अवैध निकासी पर AG ने जांच मांगी।


Bokaro IFMS Scam रांची: झारखंड के बोकारो जिले में सरकारी कर्मचारियों के संवेदनशील एम्प्लॉयी मास्टर डेटा में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस गड़बड़ी का उद्देश्य न केवल अवैध वित्तीय निकासी करना था, बल्कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर उन्हें लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना भी था।

महालेखाकार (AG) की जांच में यह खुलासा हुआ है, जिसके बाद राज्य सरकार को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की अनुशंसा की गई है। महालेखाकार ने इसे असाधारण और गंभीर घटना बताते हुए कहा है कि इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव होना सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।


Key Highlights:

  • बोकारो में IFMS मास्टर डेटा से बड़े घोटाले का खुलासा

  • 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि और 5037 की योगदान तिथि बदली गई

  • 15.98 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया

  • बोकारो एसपी के नाम से खुले खाते से 271 ट्रांजेक्शन किए गए

  • महालेखाकार ने उच्चस्तरीय जांच की अनुशंसा की


Bokaro IFMS Scam: 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि और 5037 की योगदान तिथि बदली गई

महालेखाकार ने जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के एम्प्लॉयी मास्टर डेटा का तुलनात्मक विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि 2175 सरकारी कर्मियों की जन्मतिथि बदली गई, जबकि 5037 कर्मचारियों की योगदान तिथि में बदलाव किया गया।

IFMS में कर्मचारियों की जन्मतिथि, प्रोन्नति, वेतन, जीपीएफ और सेवा संबंधी पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। ऐसे में इस स्तर की छेड़छाड़ से न केवल वित्तीय अनियमितता की आशंका बढ़ी है, बल्कि सरकारी सेवा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न उठे हैं।

जन्मतिथि बदलने का सीधा असर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति पर पड़ता है। इससे कई कर्मियों को नियम से अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने की संभावना बन जाती है।

Bokaro IFMS Scam: बोकारो एसपी के नाम से खुले खाते से 15.98 करोड़ की निकासी

महालेखाकार की जांच में यह भी सामने आया कि बोकारो एसपी के नाम से खुले एक बैंक खाते का इस्तेमाल कर 15.98 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई।

मई 2017 से नवंबर 2025 के बीच कुल 271 ट्रांजेक्शन के माध्यम से यह राशि ट्रांसफर की गई। इसमें 12.48 करोड़ रुपये यात्रा भत्ता, 2.71 करोड़ रुपये जीएसटी और 63 लाख रुपये वन कार्य मद से जुड़े बताए गए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस खाते को 14 अलग-अलग जीपीएफ नंबरों से जोड़ा गया था, जिनमें से 13 नंबर अन्य व्यक्तियों के थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय घोटाला था।

Bokaro IFMS Scam: सुराग मिटाने के लिए मास्टर डेटाबेस से खाता डिलीट

फर्जी निकासी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनवरी 2026 में इस खाते को मास्टर डेटाबेस से ही डिलीट कर दिया गया, ताकि जांच के दौरान सुराग न मिल सके।

महालेखाकार ने इस कार्रवाई को बेहद गंभीर माना है और कहा है कि यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा में बड़ी सेंध है।

उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने की सिफारिश की है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।

बोकारो में सामने आया यह मामला अब राज्य प्रशासन और वित्तीय निगरानी तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। IFMS जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म में इस तरह की हेराफेरी ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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