Cause Of Defeat : भानु प्रताप शाही बोले – झारखंड में जहां-जहां घटे आदिवासी और बढ़े मुसलमान, वहीं हारी भाजपा

रांची : Cause Of Defeatभानु प्रताप शाही बोले – झारखंड में जहां-जहां घटे आदिवासी और बढ़े मुसलमान, वहीं हारी भाजपा। संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में जमीनी स्तर पर मिले फीड़बैक का विश्लेषण कर अपनी कमियों को सही कर भाजपा झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए अभी से कमर कस चुकी है। इसी क्रम में भवनाथपुर से भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने काफी अहम बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर खुलकर कहा कि संपन्न हुए लोकसभा चुनाव भाजपा उन्हीं सीटों पर झारखंड में हारी, जहां आदिवासियों की संख्या घट गई है और मुसलमानों की संख्या बढ़ गई है। लगे हाथ उन्होंने कहा कि यह जमीनी सच्चाई है और तमाम सर्वे में भी यही तथ्य सामने आए हैं।

शाही बोले – लोकसभा चुनाव में आदिवासियों को विरोधी दलों ने गुमराह किया

रविवार को रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में झारखंड के चुनाव प्रभारी के तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सह चुनाव प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा पहुंचे थे। बैठक से निकलने पर भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही अपने चिरपरिचित तेवर में दिखे। उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से ही आदिवासियों के हितैषी रही है। भाजपा ने ही सबसे ज्यादा आदिवासिय़ों की चिंता की और उसी लिए झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्य का गठन भाजपा के राज में ही हुआ। संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में आदिवासी बहुल पांच सीटों पर भाजपा के पिछड़ने की वजह बताते हुए विधायक भानु प्रताप शाही ने अपने अंदाज में बात रखी। कहा कि भाजपा विरोधी दलों की ओर से लोकसभा चुनाव के दौरान एक बड़ा षड़यंत्र आदिवासी समाज के बीच, अनुसूचित जाति और ओबीसी वालों के बीच रचा गया। उन्हें गुमराह किया गया और भरमाया गया कि भाजपा आएगी तो जमीन हड़प लेगी, आरक्षण खत्म कर देगी और संविधान बदल देगी। भाजपा विरोधी दलों ने झारखंड में जनता के इस वर्ग में झूठ बोलकर लोगों को गुमराह किया। लेकिन अब जनता भी इस बात को समझ गई है कि भाजपा और पीएम मोदी के राज में न तो आरक्षण खत्म होगा, ना आदिवासियों की जमीन लूटी जाएगी और ना ही संविधान बदलेगा।

शाही का दावा – आदिवासियों की घटती आबादी पर खुलकर बोलेगी भाजपा

विधायक भानु प्रताप शाही ने आगे कहा कि झारखंड भाजपा ने बनाया। भाजपा आदिवासियों की पीड़ा समझती है और इसीलिए झारखंड राज्य का गठन किया। आदिवासी बहुल कहे जाने वाले झारखंड के पांच लोकसभा सीटों में से चार में जमीन  तौर पर डेमोग्राफी ही बदल गई है। गोड्डा, पाकुड़, दुमका, साहेबगंज और जामताड़ा में जाकर देखिए तो बदली हुई डेमोग्राफी दिखेगी। वहां आदिवासियों की संख्या घट गई और मुसलमानों की संख्या बढ़ गई। भानु प्रताप शाही यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यह बात हम भाजपा वाले नहीं बोलेंगे तो कौन बोलेगा। हम आदिवासियों के हित इस बारे में खुल कर बोलेंगे। आदिवासियों की संख्या इन इलाकों में घटना गंभीर चिंता का विषय है। जिस पैमाने पर यहां आदिवासियों की संख्या हाल के वर्षों में घटी है, वह अगर जारी रही तो अगले 20 साल में आदिवासी बहुल कहा जाने वाले झारखंड के इलाकों में ही आदिवासी नाममात्र को रह जाएंगे।

विधायक भानु प्रताप शाही ने आगे कहा कि झारखंड भाजपा ने बनाया। भाजपा आदिवासियों की पीड़ा समझती है और इसीलिए झारखंड राज्य का गठन किया।
फाइल फोटो

‘लोकसभा के चुनावी नतीजों में झारखंड में विधानसभा के लिए एनडीए को मिला जनादेश’

विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में भाजपा लोकसभा चुनाव के समय से ही जुट गई थी। लोकसभा चुनाव के नतीजों में ही झारखंड की जनता ने विधानसभा के लिए भी एनडीए को बहुमत का जनादेश दे दिया है। अब लोकसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद पूरी तरह से विधानसभावार हालातों पर और समीकरणों पर फोकस है। इस समय कार्यकर्तांओं में जिस उत्साह और जोश की जरूरत नए सिरे महसूस की जा रही थी, वह भाजपा नेतृत्व में चुनाव प्रभारी के रूप में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सह चुनाव प्रभारी के रूप में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा को यहां भेज कर कर दिया है। इन नेताओँ के यहां आने से भाजपा को परिपक्वता मिली है। इनके मार्गदर्शन में झारखंडल में फिर से भाजपा सरकार बनाएगी। भानु प्रताप शाही आगे यह भी कहा कि झारंखड़ में भाजपा का कार्यकर्ता भी सरकार बनाने के लिए कंपिटेंट है। झारखंड में पहले उसी कंपिटेंट कार्यकर्ताओं ने सरकार बनाई थी और अब इस बार उसी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने को भाजपा के दो नेता पहुंचे हैं।

बोले भानु प्रताप – चुनाव के चलते बचे सीएम चंपाई, वर्ना कल्पना सोरेन होतीं सीएम

प्रदेश की सत्तारूढ़ झामुमो सरकार का जिक्र छिड़ते ही भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही हंस पड़े। सीएम चंपाई सोरेन पर चुटकी लेते हुए कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए सीएम चंपाई सोरेन बच गए हैं नहीं तो सबसे पहला नियुक्ति कल्पना सोरेन का होने जा रहा था। वह मुख्यमंत्री बनने वाली थीं, यह तथ्य सर्वविदित है। उन्होंने कल्पना सोरेन के सीएम बनने की बात से इंकार किए जाने का जिक्र आते ही कहा कि इधर तीन महीने के लिए वह सीएम नहीं बनीं या नहीं बनना चाहती हैं तो सही है। लेकिन यही टाइम पीरियड एक साल का होता तो सोरेन परिवार सत्ता के बिना सात दिन भी रहना पसंद नहीं करेगा।

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