Hemant Soren और RJD Alliance पर भानु प्रताप शाही का हमला: झारखंड के साथ अन्याय 

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 Hemant Soren और RJD Alliance पर भानु प्रताप शाही का हमला: झारखंड के साथ अन्याय 
 Hemant Soren और RJD Alliance पर भानु प्रताप शाही का हमला: झारखंड के साथ अन्याय 
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हेमन्त सोरेन के RJD गठबंधन पर भानु प्रताप शाही ने तीखा हमला किया; कहा—झारखंड के खिलाफ गठबंधन से राज्य को नुकसान होगा, जनता इसे माफ़ नहीं करेगी।


रांची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर शब्दों की जंग तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व नेता और स्थानीय भाजपा के प्रभावशाली चेहरा भानु प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पर कड़े आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में RJD के साथ किया गया गठबंधन झारखंड के हित के खिलाफ है और इसका खामियाजा प्रदेश की जनता व सत्ता दोनों को भुगतना पड़ेगा।

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शाही ने आगे कहा कि राजद को झारखंड में ‘सम्मान’ दिया गया, उसे मंत्री भी बनाए गए, लेकिन बिहार में राजद नेताओं के साथ जो व्यवहार हुआ वह वाजिब नहीं था — वहाँ उन्हें धक्का देकर निकाला गया था। इस विरोधाभास को शाही ने उभारते हुए पूछा कि आखिर शासन की नीति और गठबंधन का कसौटी क्या है, और क्या यह झारखंड की जनता के हित में है?


Key Highlights

  • पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पर RJD के साथ गठबंधन को झारखंड-विरोधी करार दिया। 

  • शाही का आरोप: राजद को झारखंड में खूब सम्मान और मंत्री पद मिला, जबकि बिहार में उन्हें धक्का देकर निकाला गया। 

  • भानु प्रताप ने विधानसभा में कहा था कि यह “बिना मेल का गठबंधन” है और यह राज्यहित के खिलाफ है। 

  • उन्होंने कहा कि 1932 का नारा उठाने वाले नेताओं के ही परिवार के लोग आज RJD की टिकट पर बिहार चुनाव लड़ रहे हैं — यह विरोधाभास जनता नहीं भूलेगी।

  • शाही ने चेतावनी दी कि यह गठबंधन झारखंड को नुकसान पहुंचा सकता है और इसकी कीमत संबंधित नेताओं को चुकानी पड़ सकती है। 


पूर्व मंत्री ने विधानसभा में पहले भी चेतावनी दी थी कि यह “बिना मेल का गठबंधन” है और ऐसे गठबंधन राज्यहित के खिलाफ काम कर सकते हैं। शाही ने कहा कि गठबंधन बनाते समय स्थानीय भावना और हितों को तवज्जो नहीं दी गई। वे बोले कि कुछ नेताओं ने 1932 जैसे नारे उठाए — आज उसी सोच के लोगों के ही परिवार के सदस्य RJD टिकट पर बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं, और इससे नैतिक विरोधाभास उजागर होता है।

भानु प्रताप शाही का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अपने स्वार्थ में ऐसे गठबंधन किए हैं जो झारखंड को ‘गर्त’ की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस फैसले को नहीं भुलाएगी और संबंधित नेताओं को इसका खामियाजा उठाना होगा। शाही के तेवर स्पष्ट रहे—उन्होंने कहा कि झारखंड के अधिकार और सम्मान की रक्षा उनके लिए प्राथमिकता है।

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