Chanho Karam Festival, चान्हो: सरना समिति, चान्हो के तत्वावधान में सरना बाल विकास उच्च विद्यालय, पोढ़ाटोली में करम पूर्व संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न खोड़हा दलों के साथ पारंपरिक नृत्य में सहभागी बनकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक एकता से जुड़ने का अवसर है। करम पूर्व संध्या आदिवासी पहचान, प्रकृति के प्रति आस्था और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
करम पर्व प्रकृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक
मंत्री ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी करम पूर्व संध्या पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद सरना समिति जिस समर्पण, निरंतरता और सामूहिक भावना के साथ आयोजन को भव्य स्वरूप दे रही है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि विभिन्न खोड़हा दलों की सहभागिता सामुदायिक एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि का सुंदर उदाहरण है। त्योहार समाज के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करते हैं। ऐसे अवसरों पर परिवार, मित्र और समाज के लोग एक साथ जुटते हैं, संवाद करते हैं और अपनी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लेते हैं।
जल, जंगल और जमीन के प्रति आस्था का संदेश
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवन-दर्शन अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। आदिवासी समाज के पुरखे प्रकृति को जीवन का आधार मानते हुए जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों के प्रति श्रद्धा रखते आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीने की परंपरा समाज की अमूल्य विरासत है। इसे सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सभी की है। करम पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उसके संरक्षण का संदेश भी देता है।

आदिवासी पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर जोर
मंत्री ने कहा कि देश के आदिवासी समुदायों को उनकी विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप सम्मान मिलना चाहिए। आदिवासी समाज लंबे समय से अपनी प्रकृति आधारित आस्था और जीवन-दर्शन को संरक्षित करता आया है। उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहार केवल मनोरंजन और उत्सव तक सीमित नहीं होते। ये समाज में सद्भाव बनाए रखने, बेहतर इंसान बनने और बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा भी देते हैं। समाज को जोड़ने वाली परंपराओं को मजबूत करना वर्तमान समय में पहले से अधिक जरूरी है।

युवाओं से अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने की अपील
शिल्पी नेहा तिर्की ने युवाओं से विशेष आग्रह किया कि वे अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा, पर्व-त्योहार और पुरखों के जीवन-दर्शन को समझें। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझकर आगे बढ़ेगी, तो समाज की समृद्ध परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने एकता, भाईचारे और आपसी संवाद की भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
खोड़हा दलों की प्रस्तुति ने बढ़ाया कार्यक्रम का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न खोड़हा दलों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कलाकारों के साथ नृत्य में भाग लेकर उनका उत्साहवर्धन किया। इससे कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों और सांस्कृतिक दलों में उत्साह देखने को मिला। मंत्री ने करम पूर्व संध्या में शामिल सभी खोड़हा दलों, आयोजन समिति और चान्होवासियों को हार्दिक जोहार के साथ करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर शिव उरांव, महादेव उरांव, एतवा उरांव, मोरहा उरांव, चरवा उरांव, मन्ना उरांव, मारवाड़ी उरांव सहित सरना समिति के पदाधिकारी, विभिन्न खोड़हा दलों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।



















