JFTA Vyangya Ke Rang Theatre Festival, रांची: राजधानी राँची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित JFTA स्टूडियो थिएटर में रविवार, 20 सितंबर 2026 को एक दिवसीय ‘व्यंग्य के रंग’ नाट्य उत्सव का आयोजन किया गया। हास्य कवि पद्मश्री अशोक चक्रधर की व्यंग्यात्मक कविताओं पर आधारित इस कार्यक्रम में दो नाटकों का मंचन हुआ। प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, व्यवस्था की खामियों और आम जीवन से जुड़े मुद्दों को हास्य और व्यंग्य के जरिए दर्शकों के सामने रखा गया।
कार्यक्रम की परिकल्पना और दोनों नाटकों का निर्देशन रंगकर्मी राजीव सिन्हा ने किया। ‘हँसी भी… व्यंग्य भी… और समाज की सच्ची बात भी…’ संदेश के साथ आयोजित इस नाट्य उत्सव में शहर के कला-प्रेमियों, रंगकर्मियों और अन्य दर्शकों ने भाग लिया। शाम 5:30 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और संवाद प्रस्तुति की सराहना की।
‘साजिश का धुआँ’ में सामाजिक षड्यंत्रों पर कटाक्ष
नाट्य उत्सव में पहला नाटक ‘साजिश का धुआँ’ प्रस्तुत किया गया। लगभग 30 मिनट की इस प्रस्तुति में समाज में मौजूद विभिन्न षड्यंत्रों, भ्रम और विचारों के धुंधलके को व्यंग्यात्मक शैली में दिखाया गया। नाटक के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों पर सवाल उठाने के साथ-साथ दर्शकों को हँसी के जरिए गंभीर विषयों पर सोचने का अवसर दिया गया। प्रस्तुति में अनन्या भारद्वाज, आयुष राज ठाकुर, उत्सव कुमार पांडे, सोनू रुद्र, सोनू कुमार महतो और ऑगस्टिन सुरिन ने अभिनय किया। कलाकारों के संवाद, मंच संचालन और सामूहिक अभिनय ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया। दर्शकों ने नाटक के व्यंग्यात्मक अंदाज को पसंद किया।
‘गरीबदास का शून्य’ में व्यवस्था पर व्यंग्य
दूसरी प्रस्तुति ‘गरीबदास का शून्य’ थी, जिसकी अवधि भी लगभग 30 मिनट रही। इस नाटक में सिस्टम, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सरकारी फाइलों के जाल में फँसे आम आदमी की परेशानियों को केंद्र में रखा गया। नाटक में यह दिखाने का प्रयास किया गया कि व्यवस्था से जुड़े कामों के लिए आम लोगों को किस तरह की उलझनों और प्रक्रियागत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हास्य और व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत इस विषय ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक व्यवस्था पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। इस नाटक में शिव शक्ति राय, सौरभ कुमार, आनंद वशिष्ठ, अंकिता प्रजापति, प्रतिभा प्रजापति, श्रीचा कुमारी, राज लक्ष्मी शर्मा, नूतन सिन्हा और सुप्रिया कुमारी ने अभिनय किया।

राजीव सिन्हा के निर्देशन की दर्शकों ने की सराहना
दोनों नाटकों की परिकल्पना और निर्देशन राजीव सिन्हा ने किया। कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों के जीवंत अभिनय, व्यंग्यात्मक संवाद अदायगी और मंच प्रस्तुति की प्रशंसा की। नाट्य उत्सव के जरिए हास्य और व्यंग्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रस्तुतियों में मनोरंजन के साथ व्यवस्था और समाज से जुड़े मुद्दों को सामने लाया गया, जिससे दर्शकों को हँसी के साथ सोचने का अवसर भी मिला।
कला-प्रेमियों की मौजूदगी से बढ़ा उत्सव का उत्साह
कार्यक्रम में राँची के कला-प्रेमी, रंगमंच से जुड़े लोग और गणमान्य दर्शक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। JFTA स्टूडियो थिएटर में आयोजित इस एक दिवसीय उत्सव ने शहर के रंगमंच प्रेमियों को एक साथ आने का अवसर दिया। दर्शकों की प्रतिक्रिया से कलाकारों का उत्साह बढ़ा। आयोजन के माध्यम से व्यंग्य आधारित नाट्य प्रस्तुतियों को मंच देने के साथ सामाजिक विषयों को रचनात्मक तरीके से सामने रखने की कोशिश की गई।
यह भी पढ़ें: Badkagaon Karma Puja: बड़कागांव में अनोखी परंपरा से शुरू होता है करमा पर्व, जानिए क्या है भूत भरनी रस्म



















