आचार संहिता उल्लंघन मामले में आज उपस्थित नहीं हो सके हेमंत सोरेन, 2 जून को होगी अगली सुनवाई

 Code of conduct violation case

Ranchi-Code of conduct violation case-मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले की सुनवाई एमपी/एमएलए की विशेष अदालत में चल रही है.  मामले में मुख्यमंत्री को स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करानी है. बुधवार को मामले में सुनवाई की तारीख निर्धारित थी, लेकिन उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई. अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख दो जून निर्धारित की है.

गले में पट्टा लगाकर मतदान स्थल पर पहुंचे हेमंत सोरेन 

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान के दिन छह मई 2019 को बूथ नंबर 388 (संत फ्रांसिस स्कूल, हरमू) में हेमंत सोरेन पत्नी के साथ मतदान करने गये.

हेमंत सोरेन अपने गले में पार्टी का पट्टा लटकाए हुए मतदान स्थल पर पहुंचे थे.

इस मामले में कार्यपालक दंडाधिकारी राकेश रंजन उरांव ने अरगोड़ा थाना में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा (कांड संख्या 149/2019) के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज करवाई थी.

मामले के जांच अधिकारी ने हेमंत सोरेन के खिलाफ लगे आरोप को सही पाते हुए 2019 में ही दाखिल कर दी गयी चुकी है. दाखिल चार्जशीट पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए हेमंत सोरेन को समन जारी किया था.

एफएसएल में सहायक निदेशक नियुक्ति मामला

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में एफएसएल में सहायक निदेशक नियुक्ति मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई की.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने इस मामले में एकल पीठ को चार सप्ताह में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने उक्त याचिका निष्पादित कर दी.

इस संबंध में अपराजिता नीना सोरेन ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि

जेपीएससी ने एफएसएल में सहायक निदेशक नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था.

लेकिन बीच में शैक्षणिक योग्यता को शिथिल कर दिया गया.

नियमानुसार विज्ञापन के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता है.

इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.

जेपीएससी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एकल पीठ ने इस मामले में प्रार्थी को अंतरिम राहत प्रदान की है.

इसमें कहा गया कि कोर्ट के अंतिम आदेश से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी.

ऐसे में अब नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग का कोई औचित्य नहीं है.

इस पर अदालत ने कहा कि यह मामला एकल पीठ में लंबित है.

ऐसे में खंडपीठ मामले में सुनवाई नहीं कर सकती है.

हालांकि अदालत ने एकल पीठ से इस मामले को चार सप्ताह में सुनवाई कर निष्पादित करने का आदेश पारित किया है.

पशु चिकित्सकों को चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने का मामला 

झारखंड हाई कोर्ट में पशु चिकित्सकों को चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई.

सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत चुनाव आयोग के नियम के अनुसार आवेदन प्राप्ति के

सात दिनों के अंदर राज्य निर्वाचन आयोग को निर्णय लेने का निर्देश दिया है.

चुनाव ड्यूटी पर लगाए गए पशु चिकित्सकों को अपने जिले के उपायुक्त (निर्वाचन पदाधिकारी)

के यहां इस संबंध में आवेदन दे सकते हैं.

अदालत ने उक्त याचिका को निष्पादित कर दिया.

इस संबंध में पशु चिकित्सक सेवा संघ की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि

चुनाव आयोग के नियम के तहत पशु चिकित्सकों को भी चुनाव ड्यूटी से छूट प्रदान की गई है.

लेकिन पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगा दी गई है.

उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया.

इसमें कहा गया है कि जानवरों को भी जीने का अधिकार है.

सभी चिकित्सकों को चुनाव में ड्यूटी लगाने पर इनका इलाज कौन करेगा.

अभी लू और गर्मी के चलते पशु बीमार हो रहे हैं. इसलिए इन्हें चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया जाए.

इस पर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सुमित गाडोडिया ने अदालत को बताया कि

प्रार्थी ने हाई कोर्ट में देरी से याचिका दाखिल की है.

पशु चिकित्सकों की चुनाव ड्यूटी लगा दी गई और उन्होंने ट्रेनिंग भी प्राप्त कर लिया है.

ऐसे में अब उनको चुनाव ड्यूटी से हटाए जाने पर दिक्कतों का समाना करना होगा.

अदालत ने निर्वाचन आयोग की दलीलों को दरकिनार करते हुए कहा कि वह चुनाव

आयोग के नियम के तहत सात दिनों के अंदर इस मामले में निर्णय ले.

रिपोर्ट- प्रोजेश

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