Cyber Fraud Refund Rule: 50 हजार से कम ठगी पर बिना FIR मिलेगा पैसा वापस

 झारखंड में 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी पर अब बिना FIR पैसा वापस मिलेगा। 2 घंटे के भीतर 1930 पर शिकायत जरूरी, 3 महीने में रिफंड संभव।


Cyber Fraud Refund Rule रांची: झारखंड में साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी होने पर थाने का चक्कर लगाने या एफआईआर दर्ज कराने की जरूरत नहीं होगी। यदि पीड़ित ठगी के दो घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करा देता है, तो बैंक स्तर पर ही रिफंड की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत पीड़ित को न कोर्ट जाना होगा और न ही वकील करने की आवश्यकता पड़ेगी। पुलिस जांच के बाद सीधे बैंक खाते में राशि वापस भेजी जाएगी।

Cyber Fraud Refund Rule:2 घंटे का ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठगी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण समय पहले 2 घंटे होते हैं, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इसी दौरान हेल्पलाइन 1930 या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करना अनिवार्य है।

शिकायत के बाद पुलिस 30 दिनों के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर बैंक को अपनी रिपोर्ट भेजेगी। बैंक को रिपोर्ट मिलते ही पीड़ित के खाते में रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

बताया गया है कि ठगी गई राशि अधिकतम 3 महीने के भीतर वापस मिल सकती है।


Key Highlights:

• 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी पर FIR जरूरी नहीं

• ठगी के 2 घंटे के भीतर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत अनिवार्य

• पुलिस 30 दिनों में जांच कर बैंक को रिपोर्ट भेजेगी

• बैंक स्तर पर ही रिफंड प्रक्रिया पूरी होगी

• 3 महीने के भीतर पीड़ित को पैसा वापस मिलने की व्यवस्था


Cyber Fraud Refund Rule:बैंक स्तर पर होगा पूरा निपटारा

आई-4सी द्वारा जारी नई एसओपी के तहत अब पूरा काम बैंक स्तर पर ही निपटाया जाएगा। इसके लिए सभी बैंकों को ‘ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल’ का एक्सेस दिया गया है और लॉगइन आईडी उपलब्ध कराई गई है।

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से बैंक और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को जल्दी राहत देने की कोशिश की जाएगी।

साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के अनुसार आरबीआई पॉलिसी के तहत 50 हजार रुपये से कम की ठगी होने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक बार यह क्लेम ले सकता है।

Cyber Fraud Refund Rule:क्यों बदला गया नियम

आंकड़ों के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत साइबर ठगी के मामले 50 हजार रुपये से कम राशि के होते हैं। कम रकम होने के कारण लोग अक्सर कोर्ट-कचहरी और पुलिस प्रक्रिया से बचने के लिए शिकायत ही नहीं करते थे।

साइबर थानों में भी एक-एक अधिकारी पर 250 से अधिक मामलों का बोझ है, जिससे रिकवरी की गति काफी धीमी हो जाती थी। वर्ष 2025 में लगभग 75 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई, लेकिन रिफंड केवल 3.25 करोड़ रुपये ही हो पाया।

इसी अंतर को कम करने और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए बैंकों को यह अधिकार दिया गया है।

Cyber Fraud Refund Rule:अगर बैंक अकाउंट फ्रीज हो जाए तो क्या करें

कई बार साइबर अपराधी किसी निर्दोष व्यक्ति के खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे उसका बैंक खाता भी फ्रीज हो जाता है। ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है।

पीड़ित को तुरंत बैंक जाकर लिखित शिकायत देनी चाहिए। बैंक पोर्टल के माध्यम से जांच करेगा। यदि ट्रांजैक्शन सही पाया गया, तो लगभग 3 महीने के भीतर खाता फिर से चालू किया जा सकता है। केवल संदिग्ध मामलों में ही पुलिस हस्तक्षेप करेगी।

Cyber Fraud Refund Rule:सावधानी अभी भी सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि नियम आसान जरूर हुआ है, लेकिन सावधानी अभी भी सबसे महत्वपूर्ण है। ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना, बैंक से ‘होल्ड रिपोर्ट’ लेना और सभी लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है।

यदि शिकायत में देरी होती है, तो अपराधी राशि को कई खातों में बांट देता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है। इसलिए समय पर कार्रवाई ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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