Diwali 2025 Deepak Significance: दीपावली पर कितने दीए जलाएं, किस दिशा में और किस तेल से जानें वास्तु व ज्योतिष अनुसार नियम

दीपावली पर कितने दीए जलाएं, किस दिशा में रखें और कौन सा तेल शुभ होता है — जानें वास्तु और ज्योतिष अनुसार दीपदान के नियम और महत्व।


Diwali 2025 Deepak Significance रांची: दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मिट्टी का दीया जलाना सबसे शुभ माना गया है क्योंकि यह पृथ्वी तत्व से जुड़ा है और घर में समृद्धि व शांति लाता है।

 कितने दीए जलाएं — विषम संख्या का महत्व:

दीपावली के दिन विषम संख्या में दीए जलाना शुभ माना जाता है — जैसे 5, 7, 11, 21, 51 या 109
हर दीये का अपना महत्व है —

  • पहला दीया मुख्य पूजा स्थल पर,

  • दूसरा रसोई में,

  • तीसरा पानी के पास,

  • चौथा पीपल या तुलसी के पास,

  • पांचवां घर के मुख्य द्वार पर जलाना चाहिए।

धनतेरस के दिन कई जगहों पर 13 दीए जलाने की परंपरा है, वहीं कहीं केवल एक दीया यमराज के नाम से निकाला जाता है।

सम संख्या में दीए (जैसे 10, 20 या 30) नहीं जलाने चाहिए, क्योंकि वास्तु के अनुसार यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं।


Key Highlights:

  • दीपावली पर विषम संख्या में दीए जलाना शुभ माना जाता है — जैसे 5, 7, 11, 21 या 51।

  • मां लक्ष्मी पूजा में मिट्टी के दीए जलाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है।

  • धनतेरस पर “यम दीप” जलाना शुभ, अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

  • अलग-अलग तेल से दीपक जलाने के अलग ग्रहों पर प्रभाव — घी, सरसों, तिल, करंज और पंच दीपम तेल।

  • चौमुखी दीपक चारों दिशाओं में समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है।


 मंत्र और अर्थ:

“शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥”

अर्थ:
हे दीपक! आप कल्याण, स्वास्थ्य, धन-संपदा और विजय के दाता हैं। मैं आपको नमन करता हूं।

 किस तेल से दीप जलाएं — ग्रहों और लाभ के अनुसार:

तेल का प्रकारउपयोग का ग्रह / लाभमहत्व
घीमां लक्ष्मी की कृपा के लिएसबसे शुभ और शुद्ध माना गया
सरसों का तेलशनिदेव की कृपा व कष्टों से मुक्तिधनतेरस व यम दीप के लिए उपयुक्त
करंज का तेलराहु-केतु दोष शांतिमां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है
तिल का तेलमंगल और चंद्रमा की स्थिति मजबूतमानसिक शांति व आत्मबल बढ़ाता है
पंच दीपम तेल (5 तेलों का मिश्रण)घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करता हैज्ञान, स्वास्थ्य और सुख का प्रतीक

 यम दीप का महत्व — दक्षिण दिशा में जलाएं:

धनतेरस की संध्या को यमराज के नाम का दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है।

  • यह चौमुखी दीपक होता है जिसमें चार बत्तियां होती हैं।

  • इसे सरसों के तेल में जलाया जाता है।

  • दक्षिण दिशा (यम की दिशा) में घर के मुख्य द्वार के बाहर रखें।
    मान्यता है कि यम दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।

 दीपदान का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व:

ज्योतिषाचार्य शालिनी वैद्य के अनुसार, दीपदान सुख, शांति और समृद्धि का दाता है।

  • शनि ग्रह के लिए: तिल के तेल का दीपक जलाएं।

  • मंगल ग्रह के लिए: चमेली तेल का दीपक उत्तम।

  • राहु-केतु दोष शांति के लिए: सरसों का तेल।

  • बृहस्पति ग्रह की कृपा के लिए: पीतल के दीपक में घी का उपयोग करें।

कार्तिक मास और माघ मास में किया गया दीपदान विशेष पुण्यदायक होता है।

 चौमुखी दीपक का प्रतीक:

चौमुखी दीपक केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि शादी-विवाह और शुभ कार्यों में भी उपयोग किया जाता है।
इसका चारमुखी स्वरूप चारों दिशाओं में समृद्धि, सुख और सकारात्मकता का प्रतीक है।

 

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