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Domestic Violence Case: कोर्ट के आदेश के बाद भी ससुराल में नहीं मिली एंट्री, पूरी रात दरवाजे पर बैठी रही पीड़िता

रांची में घरेलू हिंसा मामले में कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद पीड़िता को ससुराल में प्रवेश नहीं मिला। अदालत ने एक लाख रुपये मुआवजा और आवास उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।


Domestic Violence Case रांची: घरेलू हिंसा के एक चर्चित मामले में अदालत से न्याय मिलने के बाद भी एक महिला को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। रांची सिविल कोर्ट के आदेश के बावजूद पीड़िता कुमकुम शिवा को उसकी ससुराल में प्रवेश नहीं मिल सका और उसे पूरी रात घर के बाहर इंतजार करना पड़ा। इस घटना ने न्यायिक आदेशों के अनुपालन और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़िता का कहना है कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद ससुराल पक्ष ने न केवल उसे घर में घुसने नहीं दिया, बल्कि उसके पहुंचते ही घर का दरवाजा बंद कर लिया। देर रात तक वह ससुराल के आंगन में बैठी रही, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला।

Domestic Violence Case:घरेलू हिंसा मामले में अदालत ने दिया पीड़िता के पक्ष में फैसला

रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद पीड़िता कुमकुम शिवा के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने पीड़िता के पति कुमार चिरंजीव झा, ससुर मुंद्रिका झा और सास रुना झा को घरेलू हिंसा में संलिप्त माना।

कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि उसे उसके वैवाहिक घर में रहने की अनुमति दी जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो उसके स्तर के अनुरूप वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए या फिर किराये के लिए प्रति माह चार हजार रुपये दिए जाएं।


Key Highlights

  • घरेलू हिंसा मामले में पीड़िता के पक्ष में आया अदालत का फैसला।

  • कोर्ट ने पति, सास और ससुर को घरेलू हिंसा का दोषी माना।

  • एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश।

  • ससुराल में रहने देने या वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के निर्देश।

  • कोर्ट के आदेश के बावजूद पीड़िता को घर में प्रवेश नहीं मिला।


Domestic Violence Case:पुलिस और सीडीपीओ की मौजूदगी में पहुंची ससुराल

अदालत के आदेश के अनुपालन के लिए धुर्वा थाना प्रभारी और सीडीपीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस और सीडीपीओ की मौजूदगी में कुमकुम शिवा को धुर्वा स्थित उसके ससुराल पहुंचाया गया।

पीड़िता के अनुसार, वह अदालत का आदेश लेकर ससुराल पहुंची थी, लेकिन उसे देखते ही घर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया। उसने देर रात तक घर के बाहर इंतजार किया, फिर भी उसे अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।

Domestic Violence Case:दहेज प्रताड़ना और गर्भपात का लगाया आरोप

कुमकुम शिवा ने बताया कि उसकी शादी 18 अप्रैल 2018 को चिरंजीव झा के साथ हुई थी। उसके अनुसार विवाह के समय ससुराल पक्ष ने आठ लाख रुपये दहेज की मांग की थी। हालांकि उसके पिता पांच लाख रुपये ही दे सके थे।

पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। उसने यह भी आरोप लगाया कि दहेज की मांग को लेकर उसके साथ अत्याचार किया गया और उसका गर्भपात भी कराया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर उसने न्यायालय की शरण ली थी।

Domestic Violence Case:आदेश के पालन पर उठे सवाल

अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पीड़िता को ससुराल में प्रवेश नहीं मिलने की घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।

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