दुमका: झारखंड के दुमका विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा के सुनील सोरेन और झामुमो के बसंत सोरेन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई और झामुमो प्रत्याशी बसंत सोरेन को हराने की चुनौती भाजपा उम्मीदवार सुनील सोरेन के सामने है। सुनील, सोरेन परिवार के खिलाफ पहले भी चुनावी मैदान में जीत चुके हैं—उन्होंने जामा सीट पर मुख्यमंत्री के बड़े भाई दुर्गा सोरेन को हराकर विधायक बने थे और बाद में शिबू सोरेन को दुमका से हराकर लोकसभा पहुंचे थे।
दुमका विधानसभा क्षेत्र में अब तक किसी भी उम्मीदवार को दोबारा जीतने का मौका नहीं मिला है, क्योंकि यहां की जनता हर चुनाव में नए चेहरे को मौका देने का रुख अपनाती आई है। भाजपा ने इस बार पूर्व विधायक लुईस मरांडी का टिकट काटकर सुनील सोरेन पर भरोसा जताया है, लेकिन लुईस ने इसे अपना अपमान समझकर झामुमो का दामन थाम लिया और अब जामा से झामुमो उम्मीदवार बनकर मैदान में हैं। इससे भाजपा में अंदरूनी असंतोष बढ़ा है, और लुईस समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं का झामुमो की ओर झुकाव सुनील के लिए चुनौती बन गया है।
इस बार दुमका चुनाव में भ्रष्टाचार, भितरघात और घुसपैठ जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए हैं। झामुमो ने मंईयां सम्मान योजना, बिजली बिल माफी और कई अन्य जनकल्याण योजनाओं के माध्यम से जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, भाजपा बांग्लादेशी घुसपैठ और राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को प्रमुख चुनावी मुद्दे बनाकर जनता का समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है।
महिला प्रधान इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,56,694 मतदाता हैं, जिनमें से 1,30,513 महिला और 1,26,181 पुरुष मतदाता हैं। शहरी और ग्रामीण मिश्रित क्षेत्र वाले दुमका में महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। इस चुनाव में जहां सुनील को अपनी पार्टी के फैसले की सही ठहराने की चुनौती है, वहीं बसंत को अपने भाई और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिष्ठा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी है।







