झारखंड शराब घोटाले की ACB जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नकली होलोग्राम सप्लाई करने वाली कंपनी का ही सॉफ्टवेयर शराब की Track and Trace व्यवस्था संभाल रहा था।
Jharkhand Liquor Scam रांची: झारखंड के चर्चित शराब घोटाले की जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि जिस कंपनी को शराब की बोतलों पर होलोग्राम सप्लाई करने का ठेका मिला था, उसी कंपनी का सॉफ्टवेयर राज्य में शराब की Track and Trace व्यवस्था को भी संचालित कर रहा था।
जांच एजेंसी को आशंका है कि इसी व्यवस्था की वजह से बॉटलिंग प्लांट से लेकर शराब दुकानों और ग्राहकों तक पहुंचने वाली शराब की डिजिटल निगरानी प्रभावी नहीं रह सकी। इससे नकली होलोग्राम के जरिए शराब की आपूर्ति का खेल लंबे समय तक चलता रहा।
Jharkhand Liquor Scam:प्रिज्म होलोग्राफी का ही था ट्रैक एंड ट्रेस सॉफ्टवेयर
एसीबी की जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को शराब के लिए होलोग्राम आपूर्ति का काम मिला था। इसी कंपनी से जुड़े सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल राज्य की शराब आपूर्ति व्यवस्था में Track and Trace सिस्टम के लिए किया जा रहा था।
इस व्यवस्था का उद्देश्य शराब की बोतल के बॉटलिंग प्लांट से निकलने से लेकर शराब दुकान तक पहुंचने और बिक्री होने तक उसकी डिजिटल निगरानी करना था। लेकिन जांच में नकली होलोग्राम वाली शराब के सिस्टम की निगरानी से बाहर रहने का सवाल सामने आया है।
एसीबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि एक ही कंपनी से होलोग्राम और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था जुड़े होने से सिस्टम में किस स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश बनी और इसका फायदा किन लोगों को मिला।
Key Highlights
झारखंड शराब घोटाले की ACB जांच में डिजिटल सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा।
नकली होलोग्राम सप्लाई करने वाली कंपनी का ही Track and Trace सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होने की बात सामने आई।
JSBCL के IT मैनेजर अमर कुमार मेहता से ACB मुख्यालय में लंबी पूछताछ हुई।
एसीबी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और बयानों का मिलान कर जांच आगे बढ़ा रही है।
प्रिज्म होलोग्राफी के MD बिधु गुप्ता पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं और बाद में उन्हें डिफॉल्ट बेल मिली थी।
Jharkhand Liquor Scam:ACB मुख्यालय में IT मैनेजर से लंबी पूछताछ
इसी डिजिटल व्यवस्था की पड़ताल के लिए झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के आईटी मैनेजर अमर कुमार मेहता को एसीबी ने समन जारी कर पूछताछ के लिए मुख्यालय बुलाया था। शुक्रवार को वह एसीबी मुख्यालय पहुंचे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे लंबे समय तक पूछताछ की।
पूछताछ में Track and Trace सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और नकली होलोग्राम के जरिए सप्लाई हुई शराब की डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े सवाल पूछे गए। जांच अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि जब राज्य में शराब की डिजिटल निगरानी की व्यवस्था मौजूद थी, तब नकली होलोग्राम वाली शराब सिस्टम की नजर से कैसे बचती रही।
सूत्रों के अनुसार आईटी मैनेजर से तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं से जुड़े कई सवाल पूछे गए। एसीबी अब पूछताछ में सामने आए बयानों का इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान कर रही है।
Jharkhand Liquor Scam:विनय चौबे के कार्यकाल में मिला था होलोग्राम का ठेका
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में बिधु गुप्ता की कंपनी मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को होलोग्राम आपूर्ति का ठेका मिला था।
कंपनी के प्रबंध निदेशक बिधु गुप्ता को एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।
जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इसमें होलोग्राम की आपूर्ति, शराब की डिजिटल ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सरकारी अधिकारियों की भूमिका समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस मामले में बिधु गुप्ता का नाम ग्रेटर नोएडा से जुड़े मामलों और छत्तीसगढ़ के आबकारी घोटाले की जांच के संदर्भ में भी सामने आ चुका है। ऐसे में एसीबी की मौजूदा जांच में झारखंड की शराब आपूर्ति व्यवस्था में कंपनी की वास्तविक भूमिका और सिस्टम पर उसके प्रभाव को अहम माना जा रहा है।
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