Ranchi-राज्य सरकार के द्वारा झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट दायर स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को लंबित जनहित याचिकाओं की मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है.
बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर शेल कंपनियों में निवेश और अनगड़ा में 88 डिसमल जमीन पर मुख्यमंत्री रहते खनन लीज का आवंटन करवाने का आरोप है. इस मामले में शिवशंकर शर्मा ने मामले की जांच सीबीआई औक ईडी से करवाने के लिए झारखंड हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. इसे अभी तक अदालत के द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है. इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कर दिया है. जबकि इसकी कॉपी पीड़ित पक्ष को नहीं दी गयी है. इसी आधार पर सरकार ने झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को निरस्त करने की मांग की थी, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को सबसे पहले लंबित जनहित याचिकाओं की मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है.
इधर झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में माइनिंग लीज मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद होईकोर्ट ने
पीआईएल की मेंटेनेबिलिटी एक जून को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है. मामले में राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिबल, हेमंत सोरेन की ओर से वरीय अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने बहस की. खंडपीठ ने कहा है कि जिस किसी को भी मामले में प्रति उतर दायर करना है, वह दायर कर दे. इसके बाद कोर्ट की ओर से समय नहीं दिया जायगा.


















