रांची: मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना को लेकर हाल ही में पीआईएल दायर की गई है, जिसने राजनीति में तूफान मचा दिया है। इस योजना के तहत राज्य की 21 से 50 साल की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये दिए जा रहे हैं।
हालाँकि, यह योजना चुनावी मौसम में शुरू की गई है, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह योजना वोटर लुभावन की चाल है।
सिमडेगा के विष्णु साहू ने इस योजना के खर्च पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि इस योजना की शुरुआत चुनावी माहौल को देखते हुए की गई है, जिससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि यह योजना सिर्फ वोट बटोरने का एक प्रयास हो सकता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर इस पीआईएल को दायर करवाने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी राज्य की महिलाओं की भलाई नहीं चाहती और इस योजना से उन्हें परेशानी हो रही है। सोरेन ने यह भी दावा किया कि बीजेपी इस योजना के खिलाफ अदालत में झूठे आरोप लगा रही है और इससे पार्टी की घबराहट सामने आ रही है।
बीजेपी ने मुख्यमंत्री के आरोपों का पलटवार किया है। बीजेपी के चुनाव प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी पार्टी मैया सम्मान योजना का समर्थन करती है और वे इस मामले में हाई कोर्ट में शपथ पत्र दायर करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास फंड की कमी है और इसलिए सरकार ने खुद अपने समर्थकों से पीआईएल दायर करवाया है।
हेमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि बीजेपी एक और बड़ी योजना की घोषणा करने जा रही है, जो अक्टूबर में शुरू हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि यह योजना मैया सम्मान योजना से भी बड़ी होगी और यदि जरूरी हुआ तो बीजेपी इस योजना को भी पूरी तरह से समर्थन देने के लिए एफिडेविट (शपथ पत्र) दायर कर सकती है।
इस सियासी विवाद ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है और हाई कोर्ट में दायर पीआईएल ने सरकार और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को और भी गर्म कर दिया है।



















