झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी में लंबित प्रारंभिक जांच मामलों के निष्पादन में देरी पर नाराजगी जताई है। अदालत ने सरकार को अद्यतन स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
ACB Investigation रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी में लंबित प्रारंभिक जांच (पीई) मामलों के निष्पादन में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने की आवश्यकता है और सरकार को सभी लंबित प्रारंभिक जांचों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि एसीबी में लंबित सभी पीई मामलों की ताजा जानकारी एकत्र कर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
ACB Investigation:स्वत संज्ञान वाली जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
यह निर्देश हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने की।
जनहित याचिका में एसीबी में लंबित प्रारंभिक जांच मामलों के शीघ्र निष्पादन और उनकी प्रगति को लेकर चिंता जताई गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने लंबित मामलों की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी।
ACB Investigation:पुरानी रिपोर्ट पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि लंबित पीई मामलों की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकती है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट जनवरी 2026 तक की स्थिति को दर्शाती है।
इस पर खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जनवरी 2026 के बाद लगभग पांच महीने का समय बीत चुका है। ऐसे में पुरानी रिपोर्ट अदालत की सहायता के लिए पर्याप्त नहीं होगी। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाली नई और अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।
Key Highlights
एसीबी की धीमी प्रारंभिक जांच पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
लंबित पीई मामलों की ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी गई
रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश करने का निर्देश
जनवरी 2026 तक की रिपोर्ट को कोर्ट ने माना अपर्याप्त
मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी
ACB Investigation:25 जून को होगी अगली सुनवाई
खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 25 जून की तिथि निर्धारित की है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई में एसीबी के लंबित मामलों, उनकी प्रगति और जांच की वर्तमान स्थिति से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
हाईकोर्ट की इस सख्ती को लंबित भ्रष्टाचार मामलों की जांच में तेजी लाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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