नीतीश ने भारत के सबसे गरीब राज्य बिहार को ‘जंगलराज’ को कैसे निकाला बाहर?

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 243 सीटों में से 202 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके बाद नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ भी ले चुके हैं। बिहार चुनाव में एनडीए की ये जीत बताती है कि 2005 से लेकर बिहार की जनता का नीतीश कुमार पर भरोसा अब भी बरकरार है।

2005 में जब नीतीश जब जंगलराज का मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरे थे

आपको बता दें कि 2005 में जब नीतीश कुमार जब जंगलराज का मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरे थे तब बिहार की जनता को उनमें एक नई उम्मीद दिखी थी। जिसका असर ये हुआ कि 2005 के चुनाव में जदयू को 88 और बीजेपी को 55 सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में मिली बंपर जीत के साथ से ही नीतीश कुमार ने बिहार से जंगलराज के खात्मे की शुरुआत कर दी थी।

क्या था जंगलराज ?

बिहार में 1990 से 2005 तक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बाद उनकी पत्नी व पूर्व सीएम राबड़ी देवी के राज में को जंगलराज का दौर कहा जाता है। उस दौर में बिहार में सरकार के गिरने और समाज के टूटने के इतिहास का एक काला अध्याय था। तब बिहार की पहचान जाति-आधारित प्राइवेट सेनाओं द्वारा किए गए नरसंहारों से की जाती थी, जैसे बारा (1992) और लक्ष्मणपुर बाथे (1997) की घटना आज भी लोगों को झकझोर रख देती है।

अटल बिहारी वाजपेयी जंगलराज को कैसे देखते थे?

दरअसल, 1998 से 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने लालू यादव और राबड़ी देवी के जंगलराज पर तंज कसते हुए कहा था कि ये घटनाएं देश के लिए शर्म की बात थी और देश के अंदर एक नाकाम सरकार थीं। 2003 में, पटना में एक सभा को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि बिहार में जंगलराज चल रहा है यह सिर्फ बिहार का नहीं, पूरे देश का सवाल है। वाजपेयी अक्सर राबड़ी देवी सरकार पर अपराधियों को बचाने और संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगाते थे।

नीतीश कुमार ने बिहार को जंगलराज से कैसे बाहर निकाला?

2005 में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद संभाला तो उन्हें बिहार के साथ ‘जंगलराज’ वाला टैग विरासत में मिला था। सत्ता में आते ही नीतीश कुमार ने सबसे पहले राज्य के कानून और व्यवस्था को ठीक किया। इसके लिए नीतीश कुमार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए, जिससे 2005 से 2010 के बीच एक लाख से ज्यादा अपराधियों को सजा हुई, जबकि इससे पहले के 15 साल में सिर्फ 20 हजार अपराधियों को सजा हुई थी। उन्होंने पुलिस विभाग में लगभग 70 हजार नए कर्मचारियों की भर्ती करके फोर्स को दोगुना किया। साथ ही हथियारों को अपग्रेड करके, सैलरी बढ़ाकर और राज्य में एक हजार से ज्यादा नए पुलिस स्टेशन बनाकर पुलिस सिस्टम में बड़ा बदलाव किया।

सड़कें, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण

सरकार में आते ही नीतीश कुमार ने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया। बिहार रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य और केंद्र सरकार की अलग-अलग स्कीमों के जरिए उन्होंने 2005 से 2015 के बीच 50 हजार किलोमीटर से ज्यादा हर मौसम में चलने वाली पक्की सड़कें बनाई। साथ ही 500 से ज्यादा आबादी वाले हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ा।

यह भी देखें :

बिजली

2005 से पहले बिहार बिजली किसी सपने की तरह हो गया। गांव तो छोड़िए शहरों में भी मुश्किल से तीन-चार घंटे ही बिजली आती थी। नीतीश कुमार ने सत्ता में आते ही हर गांव तक बिजली पहुंचाने का काम किया। 2005 में जहां प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 70 केडब्ल्यूएच थी 2015 तक चार गुना बढ़कर 300 केडब्ल्यूएच से ज्यादा हो गई।

शिक्षा

नीतीश कुमार जब सत्ता में आए तो उस दौर में बिहार में चरवाहा विद्यालय हुआ करता था। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए नीतीश कुमार नए स्कूल भवन बनाए साथ ही नए शिक्षकों की भी भर्ती की गई। इसके अलावा लड़कियों को स्कूल में पढ़ने के लिए साइकिल योजना की भी शुरुआत की।

यह भी पढ़े : मुख्यमंत्री ने दानापुर-बिहटा ऐलिवेटेड कॉरिडोर व शेरपुर-दिघवारा गंगा पुल के निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

Saffrn

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