आपने हेमा मालिनी स्टारर फिल्म सीता और गीता तो जरुर देखी होगी. फिल्म में हेमा मालिनी डबल रोल में थीं और जुड़वा बहनों का किरदार निभा रही थी जिनके नाम थे सीता और गीता .
आप सोच रहे होंगे कि अचानक हम आज फिल्म की बात क्यों कर रहे हैं. तो हम आपको बता दें कि झारखंड की राजनीति में अभी जो घटित हो रहा है, वो भी आपको ये सोचने पर मजबूर कर देगा कि हम सीता और गीता का जिक्र क्यों कर बैठे.
झारखंड की राजनीति में अभी सीता और गीता भी अहम रोल अदा कर रही है, हालांकि ये दोनों बहने नहीं है लेकिन अब एक ही पार्टी से जुड़ गई हैं. घबराइए नहीं हम आपको इसका मतलब भी समझाते हैं.
आज झारखंड की राजनीति में भारी उथल पुथल भरा दिन रहा. आज जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन की बड़ी बहु सीता सोरेन ने जेएमएम का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. और आज से लगभग एक महिने पहले सिंहभूम से कांग्रेस की सांसद रही गीता कोड़ा ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थी.

यानी अब भाजपा में सीता और गीत दोनों आ गई हैं और तो और आप ये संयोग ही कहे कि सीता और गीता फिल्म में लीड एक्टर रही हेमा मालिनी भी बीते कई सालों से भाजपा में ही है. हेमा मालिनी मथुरा से बीते दो टर्म से सांसद हैं और भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी हेमा मालिनी को टिकट दे दिया है.
सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद अब ध्यान देने वाली बात ये है कि झारखंड भाजपा में महिलाओं की सहभागिता लगातार बढ़ती जा रही है. राज्य की महिला नेत्रियां अन्य पार्टियों के अपेक्षा भाजपा पर अब ज्यादा भरोसा जता रही है. भाजपा ने पहले ही दो महिला नेत्रियों कोडरमा लोकसभा से अन्नपूर्णा देवी और सिंहभूम लेकसभा से गीता कोड़ा को संसदीय चुनाव के लिए टिकट दे दिया है. और अब सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने का बाद कयासों के बाजार गर्म हो गए हैं कि सीता सोरेन को भी भाजपा लोकसभा में चुनाव लड़ने का मौका दे सकती है. दुमका सीट पर सीता सोरेन को टिकट मिलने की संभावनाएं जताई जा रही है लेकिन अब तक भाजपा ने इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है. हालांकि भाजपा ने दुमका सीट से सुनील सोरेन को लोकसभा चुनाव के लिए टिकट दे चुकी है लेकिन ऐसा कई बार देखा गया है कि किसी बड़े चेहरे के पार्टी में शामिल होने से प्रत्याशियों के टिकट काटे भी जा सकते हैं.
बता दें अन्नपूर्णा देवी बीते कई सालों से भाजपा के साथ जुड़ी है लेकिन अन्नपूर्णा देवी भाजपा से पहले राजद की सदस्य थी.गीता कोड़ा ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है. और अब जेएमएम की टिकट से 3 टर्म विधायक रही सीता सोरेन ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है.
सवाल ये उठता है कि सीता सोरेन भाजपा में शामिल तो हो गई है लेकिन इससे भाजपा को क्या फायदे हो सकते हैं?
इस मामले पर राजनीतिक पंडितो का मानना है कि सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा की पकड़ संथाल परगना में मजबूत हो सकती है. वर्तमान समय में संथाल में भाजपा से एक सांसद सुनील सोरेन हैं वहीं विधानसभा में भी 16 में से महज 4 सीटें भाजपा के कब्जे में है. लेकिन सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं कि संथाल में भाजपा की पकड़ मजबूत होगी. सीता सोरेन संथाल परगना की जामा सीट से तीन टर्म से विधायक हैं और सीता सोरेन की इस जनाधार का फायदा भाजपा को आगामी चुनावों में मिल सकता है.
पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के ईडी के द्वारा गिरफ्तारी के बाद झामुमो लगातार भाजपा पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगा रही थी, अब भाजपा ने हेमंत सोरेन के परिवार के ही बड़े आदिवासी चेहरे को अपने पाले में कर के यह साबित कर दिया कि आदिवासी विरेधी होने का आरोप बेबुनियाद है.
हालांकि अब भाजपा सीता सोरेन के लिए क्या फैसले लेगी यो तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा. अब भाजपा में महिला सहभागिता का बढ़ना कांग्रेस और झामुमो के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है , अब महागठबंधन पर भी कम से कम 2 से 3 लोकसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट देने का दबाव बन जाएगा.
अब चुनावी नजीजों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि सीता सोरेन के आने से भाजपा को कितना फायदा हुआ.



















