बोकारो की बेटी सुम्मी कुमारी की संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चमका रही प्रतिभा

Bokaro: बोकारो स्टील सिटी की प्रतिभा हमेशा से चर्चा में रही है, लेकिन इस बार नाम है — सुम्मी कुमारी।सेक्टर-12E स्थित भगत सिंह पार्क के पास एक साधारण झोपड़ी में रहने वाली सुम्मी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला और मेहनत से पहचान बना रही हैं। पिता दिगंबर लोहरा, जो वर्तमान में होमगार्ड के रूप में तैनात हैं, और माता चंद्रावती देवी, एक गृहिणी हैं। इनके परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद सुम्मी ने कभी अपने सपनों को रुकने नहीं दिया।

पढ़ाई और कला—दोनों में उत्कृष्टः

सुम्मी की प्रारंभिक शिक्षा बोकारो इस्पात विद्यालय 12A और हाई स्कूल की पढ़ाई BSL स्कूल 12E में हुई। वर्तमान में वह बोकारो सिटी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक कर रही हैं और आगे चलकर IAS अधिकारी बनने का सपना रखती हैं। इसके साथ ही सुम्मी फाइन आर्ट्स की दुनिया में एक चमकता हुआ नाम बन चुकी हैं। पेंटिंग, स्केचिंग, क्ले आर्ट, पॉटरी और D.I.Y. आर्ट—सबमें उन्हें महारत हासिल है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान:

कुछ ही समय पहले हरियाणा के करनाल में आयोजित NIFFA की 25वीं सिल्वर जुबिली समारोह में सुम्मी को Niffa Young Achiever Award से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि के बाद सुम्मी न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बोकारो जिले के लिए गर्व का विषय बन चुकी हैं।

समाज सेवा में सक्रिय भूमिका:

पढ़ाई और कला के साथ सुम्मी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। स्थानीय स्तर पर वे युवाओं को प्रेरित करते हुए जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं।

प्रेरणा की मिसाल:

जहाँ आज कई युवा मोबाइल और इंटरनेट में उलझकर समय खो देते हैं, वहीं सुम्मी अपने लक्ष्य की ओर पूरी लगन के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनका मानना है—“सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरे दिल और निरंतर परिश्रम के साथ जिया जाए।”

रिपोर्टः चुमन कुमार

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