झारखंड शिक्षा परियोजना ने निर्देश जारी किया, न्यूनतम अहर्ता प्रमाणपत्र वैध होने पर पारा शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं होगी, जिलों से रिपोर्ट मांगी गई।
Jharkhand Education Update : झारखंड में पारा शिक्षकों पर की जा रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक ने सभी जिलों को पत्र जारी करते हुए निर्देश दिया है कि जिन पारा शिक्षकों का न्यूनतम अहर्ता प्रमाणपत्र वैध संस्थान से प्राप्त है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यभर में करीब 1100 पारा शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की गई थी, जिसमें कई के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। इसके बाद जिलों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, अब शिक्षा परियोजना निदेशक ने कहा है कि यदि किसी शिक्षक का न्यूनतम अहर्ता प्रमाणपत्र वैध है, तो उस पर किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
Key Highlights:
फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर भी वैध न्यूनतम योग्यता वाले पारा शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं होगी
झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक ने सभी जिलों को पत्र भेजा
राज्यभर में लगभग 1100 पारा शिक्षकों के प्रमाण पत्र की हुई थी जांच
अगर न्यूनतम अहर्ता का प्रमाणपत्र सही है तो कार्रवाई पर रोक
जिलों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई
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परियोजना की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी पारा शिक्षक की नियुक्ति इंटर स्तर पर हुई है और उसका इंटरमीडिएट प्रमाणपत्र सही है, तो चाहे उसके स्नातक प्रमाणपत्र में त्रुटि क्यों न हो, उस पर कार्रवाई नहीं होगी।
इसी तरह, कक्षा छह से आठ तक के पारा शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक निर्धारित है। अगर उनका स्नातक प्रमाणपत्र वैध है, तो उन्हें भी सुरक्षित श्रेणी में माना जाएगा।
🧾 FAQ: झारखंड शिक्षा परियोजना के नए निर्देश — पारा शिक्षकों पर कार्रवाई रोक
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❓1. झारखंड शिक्षा परियोजना ने क्या नया निर्देश जारी किया है?
👉 परियोजना निदेशक ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जिन पारा शिक्षकों के न्यूनतम अहर्ता प्रमाणपत्र वैध संस्थान से प्राप्त हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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❓2. किन पारा शिक्षकों को राहत मिलेगी?
👉 जिन शिक्षकों के पास इंटरमीडिएट या स्नातक स्तर की वैध योग्यता है — यानी न्यूनतम शैक्षणिक अहर्ता सही है — उन्हें इस आदेश के तहत राहत दी जाएगी।
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❓3. क्या फर्जी प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी?
👉 हां, जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई जारी रहेगी।
लेकिन यदि किसी शिक्षक का न्यूनतम अहर्ता प्रमाणपत्र वैध है, तो उस पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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❓4. कितने पारा शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच हुई थी?
👉 राज्यभर में लगभग 1100 पारा शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की गई थी, जिनमें कई में अनियमितताएं पाई गई थीं।
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❓5. जिलों से क्या रिपोर्ट मांगी गई है?
👉 शिक्षा परियोजना निदेशक ने सभी जिलों से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है ताकि मुख्यालय अंतिम समीक्षा कर सके।
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❓6. यह आदेश किन शिक्षकों पर लागू होगा?
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कक्षा 1–5 के लिए नियुक्त शिक्षकों पर, जिनकी न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट (12वीं) है।
कक्षा 6–8 के शिक्षकों पर, जिनकी न्यूनतम योग्यता स्नातक (Graduation) है।
यदि इन स्तरों की योग्यता वैध है, तो वे कार्रवाई से सुरक्षित रहेंगे।
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❓7. इस निर्णय से पारा शिक्षकों को क्या फायदा होगा?
👉 हजारों पारा शिक्षकों को राहत मिलेगी, जो फर्जी प्रमाणपत्र जांच को लेकर अनिश्चितता और तनाव में थे। अब वैध योग्यता वाले शिक्षकों पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं होगी।
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❓8. आगे क्या प्रक्रिया होगी?
👉 जिलों की रिपोर्ट आने के बाद, शिक्षा परियोजना मुख्यालय अंतिम निर्णय लेगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई या स्थायी निर्णय जारी किया जाएगा।
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शिक्षा परियोजना निदेशक ने जिलों से कहा है कि इस संबंध में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए, ताकि अंतिम समीक्षा की जा सके।
इस आदेश से राज्य के हजारों पारा शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना है, जो बीते महीनों में प्रमाणपत्र जांच को लेकर असमंजस में थे।


















