Jharkhand politics : हिमंता ने सब सेट कर दिया, क्या जेएमएम का किला भेद पाएगी बीजेपी…

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Ranchi : 2019 का वक्त था। सब ओर बस जेएमएम, कांग्रेस और राजद की ही गुनगान गाए जा रहे थे। सारे बीजेपी नेता और कार्यकर्ता हताश, निराश और थके हालत में मायूस नजर आ रही है। ये मायूसी थी हार की। विधानसभा चुनाव में जेएमएम और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी को तगड़ा झटका देते हुए धूल चटा दी और महागठबंधन की सरकार बना दी।

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जेएमएम ने अकेले झारखंड की 29 सीटों पर कब्जा जमाया तो वहीं कांग्रेस ने 17 सीटों पर जीत हासिल की और इस तरह से इंडिया गठबंधन की सरकार बन जाती है। इस हार के बाद बीजेपी के पार्टी ऑफिस सहित कई बड़े बीजेपी नेताओं के आवास पर भी सन्नाटा पसर गया। ये सन्नाटा था हार का। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान हुई कमियों के अफसोस जताने का।

Jharkhand politics :  बीजेपी के लिए संकटमोचक बनकर झारखंड में हिमंता बिस्वा

Jharkhand politics : हिमंता बने बीजेपी के तारणहर्ता
Jharkhand politics : हिमंता बने बीजेपी के तारणहर्ता

जिसके बाद आए हिमंता। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा और शिवराज चौहान को झारखंड की राजनीति बदलने का जिम्मा दिया गया। इस हार के बाद बीजेपी ने हार की समीक्षा की जिससे उन्हें पता चला कि आखिर चूक कहां हो रही थी। पर किसी को ये नहीं पता चल रहा था कि इस चूक को सुधारे कैसे। इसी बीच इस संकटमोचक बनकर झारखंड में हिमंता बिस्वा सरमा उभरकर सामने आते हैं।

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हिमंता सबसे पहले पार्टी के नेताओं को एकजुट करने लगे। वे एक-एक कार्यकर्ता, नेताओं के घर जा-जाकर उनको मनाया और चुनाव की तैयारियों में जोर-शोर से लगाया। जितने भी टूटे फूटे नेताओं को सबको एक जगह पर लाकर खड़ा किया। कार्यकर्ताओं और नेताओं में चुनाव को लेकर नया जोश-नई उमंग भरा। कार्यकर्ताओं को वो हिम्मत दी जो शायद हार के बाद टूट चुकी थी।

सभी सहयोगी दलो को एक करने में हेमंता की अहम भूमिका

हिमंता ने सबसे पहले हार की समीक्षा की तब जाकर उन्हें पता चला कि आखिर कमी कहां हो रही थी। हिमंता ने सबसे पहले एनडीए के घटक दलों को फिर से एक करने के लिए जीतोड़ मेहनत की और इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले चुनाव में अलग होकर चुनाव लड़ने वाली आजसू एनडीए में मिलकर चुनाव लड़ने के लिए राजी हो गई। इसके साथ ही हिमंता ने अन्य घटक दलो जदयू, लोजपा को एनडीए में फिर से शामिल कर लिया।

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इसके बाद राज्य के अहम मुद्दों बेरोजगारी, बांग्लादेशी घुसपैठ, युवाओं को रोजगार ना मिलना, ग्रामीणों की समस्याएं, आदिवासियों को एक करना, उनके प्रमुख मुद्दे, पलायन, गरीबी और राज्य की महिलाओं और बहनों को उनका सम्मान दिलाने की ठानी। उसी का नतीजा था कि बीजेपी ने इन मुद्दों को सबसे आगे रखा और इन मुद्दों को लेकर राज्यसरकार पर जमकर हमला किया।

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तो वहीं दूसरी ओर जेएमएम, कांग्रेस और राजद ने बीजेपी की सरकार को झूठा करार दिया। महागठबंधन ने बीजेपी को हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने वाली पार्टी बताया है। सीएम हेमंत सोरेन ने भी कहा है कि बीजेपी ने सत्ता के लालच में उन्हें साजिश के तहत जेल भेजवाया था।

एक-एक नाराज नेताओं को घर जाकर मनाया

इन मुद्दों पर बीजेपी ने बड़ी ही चतुराई से रणनीति बनाई और रणनीति के तहत गठबंधन सरकार पर हमला बोलते रहे। हिमंता ने खुलकर जमीनी हकीकत को जनका के सामने रखने का काम किया। चुनाव से ठीक पहले टिकट कटने के बाद बीजेपी के कई नेता नाराज हो गए और निर्दलीय रुप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। पर वो हिमंता ही थे जिन्होंने एक-एक नाराज नेताओं को घर जा-जाकर मनाया और बीजेपी का वोट कटने से बचा लिया। उन्होंने नाराज नेताओं को फिर से बीजेपी में बनाए रखा जिससे बीजेपी टूटने से बच गई।

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वहीं दूसरी ओर अगर बात करें महागठंबंधन की तो सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना मुर्मू ने अकेले दम पर मोर्चा संभाले रखा है। महागठबंधन में कोई बड़ा चेहरा ना होते हुए भी हेमंत सोरेन और कल्पना में बीजेपी को अकेले धूल चटाने का माद्दा रखते हैं। इस दौरान महागठबंधन की तरफ से राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे कई बड़े नेता लगातार बीजेपी पर हमलावर है।

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इसी दौरान हिमंता ने महागठबंधन में सेंधमारी करते हुए कई बड़े नेताओं जैसे पूर्व सीएम चंपई सोरेन, शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन, लोबिन हेंब्रम, गीता कोड़ा, एनसीपी नेता कमलेश सिंह सहित कई बड़े नेताओं को बीजेपी के पाले में किया। तो वहीं जेएमएम भी इस राजनीतिक रण में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के सहारे बीजेपी से दो-दो हाथ करने को तैयार है। हालांकि इसका पता तो 23 नवंबर के बाद ही चल पाएगा कि क्या जेएमएम के किले को बीजेपी भेद पाएगी।

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