Jharkhand Sand Crisis: 444 में सिर्फ 13 बालू घाटों की लीज फाइनल, Illegal Sand Mining से माफिया सक्रिय

 झारखंड में बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया में देरी से अवैध बालू कारोबार बढ़ा। 444 घाटों में सिर्फ 13 की लीज फाइनल, कई जिलों में माफिया सक्रिय।


Jharkhand Sand Crisis रांची: झारखंड में इस बार भी लोगों को बालू संकट का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के कैटेगरी-2 के 444 बालू घाटों में से अब तक केवल 13 घाटों की लीज प्रक्रिया पूरी हो सकी है। स्थिति यह है कि जामताड़ा, गिरिडीह और कोडरमा जैसे जिलों में अब तक किसी भी बालू घाट का टेंडर तक नहीं हो पाया है। प्रशासनिक सुस्ती का फायदा उठाकर बालू माफिया सक्रिय हो चुके हैं और कई जिलों में अवैध स्टॉक यार्ड तैयार कर लिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार 10 जून के बाद संभावित रोक को देखते हुए माफिया बड़े पैमाने पर बालू जमा कर रहे हैं, ताकि बाद में कृत्रिम किल्लत दिखाकर तीन से चार गुना अधिक कीमत पर बिक्री की जा सके।

Jharkhand Sand Crisis:धनबाद से जमशेदपुर तक सक्रिय अवैध नेटवर्क

धनबाद में केजी आश्रम, सहयोगी नगर, सुगियाडोह, रघुवर नगर और लाल बंगला इलाके में अवैध तरीके से बालू का स्टॉक किया गया है। रात के अंधेरे में नदी से बालू निकालकर इन स्थानों पर जमा किया जाता है और फिर छोटी गाड़ियों के जरिए शहर में सप्लाई की जाती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्वी टुंडी, टुंडी, गोविंदपुर, बरवड्डा, सरायकेला और धनबाद मार्ग से रोजाना बालू लदी गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन कार्रवाई नहीं करता। यही स्थिति रांची, जामताड़ा और कोडरमा में भी देखने को मिल रही है।

जमशेदपुर के इचागढ़ और तिरुलडीह इलाके में एक किलोमीटर के दायरे में चार अवैध स्टॉक यार्ड बनाए गए हैं। तिरुलडीह, बीरडीह, सोड़ो-जरगाडीह और स्वर्णरेखा नदी से रात में बालू निकालकर सुनसान इलाकों में डंप किया जा रहा है।


Key Highlights

  • झारखंड में 444 में सिर्फ 13 बालू घाटों की लीज फाइनल

  • कई जिलों में अब तक टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं

  • धनबाद और जमशेदपुर में अवैध स्टॉक यार्ड सक्रिय

  • 10 जून के बाद कीमत बढ़ाने की तैयारी में बालू माफिया

  • अवैध खनन से भू-जल स्तर और नदियों पर खतरा


Jharkhand Sand Crisis:प्रशासन बोला, जल्द पूरी होगी टेंडर प्रक्रिया

जिला प्रशासन का कहना है कि बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक कुछ स्थानों पर स्थानीय जरूरतों के लिए मुखिया चालान के माध्यम से सीमित मात्रा में बालू उठाव की अनुमति दी गयी है। प्रशासन का दावा है कि यह केवल घरेलू उपयोग के लिए है, व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए नहीं।

खनन विभाग ने यह भी कहा है कि बालू माफिया पर कार्रवाई के लिए खनन टास्क फोर्स सक्रिय है और अवैध स्टॉक की सूचना मिलने पर छापेमारी की जाएगी।

Jharkhand Sand Crisis:अवैध खनन से पर्यावरण पर गंभीर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों से अंधाधुंध बालू निकासी का असर अब भू-जल स्तर पर दिखने लगा है। नदी किनारे बसे कई गांवों में चापाकल और कुएं समय से पहले सूखने लगे हैं। दरअसल बालू पानी को जमीन के भीतर संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पोकलेन मशीनों से नदी के बीच गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। मानसून के दौरान इससे नदी का प्रवाह बदल सकता है और तटबंध टूटने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

Jharkhand Sand Crisis:पर्यावरण मंजूरी बनी बड़ी बाधा

कई जिलों में बालू घाटों का टेंडर पूरा हो चुका है, लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण संचालन शुरू नहीं हो पाया है। प्रशासन का कहना है कि वैध स्टॉकिस्ट के पास उपलब्ध बालू से फिलहाल जरूरत पूरी की जा सकती है।

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