कैमूर: जिले के भगवानपुर प्रखंड के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी का मंदिर अहिंसक बली को लेकर विश्व विख्यात है. यहां बिहार ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लोग मां मुंडेश्वरी धाम में अहिंसक बली देखने के लिए आते हैं. यह मंदिर का निर्माण कराया नहीं गया है बल्कि इसे पाया गया है, तब से पूजा अर्चना के साथ तीन बार आरती की जाती है. मंदिर के बीच में पंचमुखी शिवलिंग है जो अपना चार बार रंग दिन में बदलता है. सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह पुलिस के साथ मां मुंडेश्वरी धाम के वोलेंटियर तैनात हैं. वहीं पूरा मंदिर परिसर सीसीटीवी की निगरानी में है.
दिन में 4 बार शिवलिंग का रंग बदलता है
मंदिर के प्रधान पुजारी ने बताया कि यह मंदिर का निर्माण कराया नहीं गया है बल्कि स्टकोडीय रूप में मंदिर पाया गया है. तब से लेकर आज तक पूजा-अर्चना दिन में तीन बार होता है. उन्होंने बताया कि तांडूल प्रसाद चढ़ाया जाता है. बकरे पर फुल मंत्र के साथ मारा जाता है तो बकरा मूर्छित हो जाता है और वहीं अच्छत फूल मंत्र के साथ मारने पर बकरा फिर से जीवित हो उठता है. यह बली अनोखी है जो पूरे विश्व में कहीं नहीं दी जाती है.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मां मुंडेश्वरी धाम के प्रबंधक गोपाल जी ने बताया कि सुरक्षा को लेकर मंदिर परिसर में पुख्ता इंतजाम किया गया है. स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ वोलेंटियर लगे हुए हैं. कुल 18 सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है. यह मंदिर काफी प्राचीन है और यहां बली प्रथा के लिए विश्वविख्यात है. हजारों फीट की ऊंचाई पर मंदिर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए सीढ़ी और सड़क दोनों मार्ग है.
रिपोर्ट-देवब्रत तिवारी


















