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निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बनाया नया रिकॉर्ड, महज 7 महीने में…

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा द्वितीय सतर्कता सम्मान समारोह का आयोजन। भ्रष्ट लोकसेवकों की शिकायत करने वाले परिवादियों के साथ विभाग के अधिकारियों और लोकसेवकों को किया गया सम्मानित। मौजूदा साल के पहले सात महीनों में कुल 16 भ्रष्ट लोकसेवकों को दिलाई गई है अदालत से सजा। निगरानी के महानिदेशक जितेन्द्र सिंह गंगवार ने कहा : भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर प्रतिबद्ध है बिहार सरकार

पटना: भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीरो टॉलरेंस की नीति ने भ्रष्ट लोक लोकसेवकों के बीच खलबली मचा दी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेन्द्र सिंह गंगवार ने मंगलवार को भ्रष्ट लोकसेवकों को अदालत से सजा दिलाने वाले ब्यूरो के पदाधिकारियों, लोक अभियोजकों के साथ-साथ उन शिकायतकर्ताओं को भी सम्मानित किया, जिनकी सूचना पर निगरानी द्वारा कार्रवाई की गई थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के सभागार में मंगलवार को द्वितीय सतर्कता सम्मान समारोह सह कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेन्द्र सिंह गंगवार ने कहा कि मौजूदा वर्ष 2025 के पहले ही सात महीनों में कुल 16 भ्रष्ट लोकसेवकों को अदालत द्वारा अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई है, जो एक रिकॉर्ड है। इस साल जनवरी से जून माह के बीच कुल 12 भ्रष्ट लोकसेवकों को सजा दिलाई गई है जबकि अभी साल को खत्म होने में पांच महीने का समय शेष है।

गंगवार ने कहा कि यह तभी संभव हो सका है जब भ्रष्ट लोकसेवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार करने वाले निगरानी के अधिकारियों ने परिवादी और लोक अभियोजक की टीम के साथ समन्वय बिठाकर काम किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ सालों के आंकड़ों की तुलना में इस साल के शुरूआती छह महीने में ही ब्यूरो ने 45 लोकसेवकों रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया है जबकि वर्ष 2024 में मात्र आठ मामलों में कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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इस मौके पर सम्मानित होने वाले परिवादी आफताब आलम और परमानन्द कुमार भी मौजूद थे जिनके जज्बे और कर्मठता की खुद गंगवार ने प्रशंसा की। इस मौके पर ब्यूरो की पुलिस महानिरीक्षक गरिमा मल्लिक, डीआईजी नवीन कुमार झा और मृत्युंजय कुमार चौधरी समेत अधिकारी मौजूद थे। भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ सूचना देने वाले परिवादियों, भ्रष्ट लोकसेवक को घूस की रकम के साथ दबोचने वाले निगरानी के अधिकारियों, केस के अनुसंधानकर्ताओं, सत्यापनकर्ताओं, धावादल के सदस्यों और भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ निगरानी में शिकायत दर्ज कराने वाले परिवादियों को निगरानी ब्यूरो के सभागार में सम्मानित किया गया।

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सम्मान पाने वाले परिवादियों में कैमूर से आफताब आलम और नालंदा से परमानन्द कुमार को हरित पौधे के गमले और प्रशस्तिपत्र से सम्मानित किया गया। जितेन्द्र गंगवार ने कहा कि निगरानी से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को कोर्ट में गवाही देने के लिए अब दो दिनों का दैनिक भत्ता और यात्रा भत्ता देय होगा। उन्होंने कहा कि हम केवल उन कांडों की ही समीक्षा नहीं कर रहे हैं बल्कि उन कांडों का भी अध्ययन कर रहे हैं जिसमें अभियुक्त को कोर्ट से बरी कर दिया गया है।

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यह हमारी कमियों को जानने और समझने के लिए जरुरी है। निगरानी ब्यूरो की आईजी गरिमा मल्लिक ने कहा कि किसी भी भ्रष्ट लोकसेवक को पकडवाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका परिवादी की होती है। इसके बाद धावादल, सत्यापनकर्ता, अनुसंधानकर्ता और लोक अभियोजक के बीच बेहतर तालमेल से भ्रष्ट लोकसेवक को अदालत से सजा दिलाने में सफलता प्राप्त होती है।

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